Parenting Book Launch: ‘सुनने की कला’ से बनते हैं आत्मविश्वासी बच्चे. को-ऑथर्स और विशेषज्ञों ने साझा किए व्यावहारिक पेरेंटिंग मंत्र
‘पेरेंटिंग सिक्रेट्स फ़ॉर रेज़िंग रॉकस्टार्स’ का भव्य विमोचन. जयपुर में प्रभावी पालन-पोषण पर सार्थक संवाद
Ananya soch: Parenting Book Launch
अनन्य सोच। Mental Health Awareness: पालन-पोषण को केवल अनुशासन और अपेक्षाओं तक सीमित न रखकर संवेदनशील संवाद, धैर्य और भावनात्मक समझ की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करने वाली पुस्तक ‘पेरेंटिंग सिक्रेट्स फ़ॉर रेज़िंग रॉकस्टार्स’ का विमोचन बुधवार को एमजीडी गर्ल्स स्कूल, जयपुर में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ. 2-पेज़ेज़ बुक क्लब, जयपुर द्वारा आयोजित इस ओपन-फॉर-ऑल कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और पुस्तक प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
कार्यक्रम की शुरुआत विशिष्ट अतिथियों के प्रेरक संबोधन से हुई. वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक शिवपुरी, एमजीडी गर्ल्स स्कूल की निदेशक अर्चना एस. मनकोटिया और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. सीतारामन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रभावी पालन-पोषण की बुनियाद ‘सुनने की कला’ है. (Child Psychology) बच्चों की बात को बिना जल्दबाज़ी, पूर्वाग्रह या तुरंत निर्णय के सुनना उनके आत्मविश्वास को मजबूत करता है और माता-पिता व बच्चों के रिश्ते को गहराई देता है.
शांत मन से ही बनते हैं सही निर्णय
वक्ताओं ने आज के तेज़, प्रतिस्पर्धी और शोरभरे जीवन में मानसिक शांति के महत्व पर भी विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि शांत और संतुलित मन ही सही निर्णयों की नींव होता है और बच्चों को सबसे पहले यही वातावरण घर से मिलता है. जब अभिभावक स्वयं मानसिक रूप से स्थिर होते हैं, तभी वे बच्चों को सही मार्गदर्शन दे पाते हैं.
पैनल चर्चा में सामने आए व्यावहारिक अनुभव
कार्यक्रम के दौरान पुस्तक से जुड़े विषयों पर एक संवादात्मक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें पुस्तक के सह-लेखक एवं मनोचिकित्सक डॉ. मयंक गुप्ता और मनोवैज्ञानिक रिधिमा चौधरी ने अपने अनुभव साझा किए. इस चर्चा का संचालन 2-पेज़ेज़ बुक क्लब के सदस्य और युवा अभिभावक प्रणिता डागा एवं अंकित डागा ने किया.
डॉ. मयंक गुप्ता ने कहा कि जीवन में स्थायी सफलता का आधार केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और अनुशासन होता है. बच्चों में मेहनत करने की आदत विकसित करना उन्हें किसी भी एक कौशल से कहीं अधिक सशक्त बनाता है. वहीं रिधिमा चौधरी ने भावनात्मक जुड़ाव के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “जब बच्चे को समझा जाता है, तब वह खुद को समझना सीखता है.”
पैनल चर्चा के दौरान अभिभावकों ने अपने दैनिक जीवन से जुड़े सवाल रखे, जिन पर विशेषज्ञों ने व्यावहारिक और सरल समाधान साझा किए. यह संवाद वास्तविक चुनौतियों और आधुनिक पेरेंटिंग की जटिलताओं पर केंद्रित रहा.
साझा प्रयास से ही बनता है स्वस्थ पालन-पोषण
इस अवसर पर 2-पेज़ेज़ बुक क्लब के संस्थापक सदस्य डॉ. राम गुलाटी, प्रग्या रामजेवाल और मोहित बत्रा भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि स्वस्थ और सकारात्मक पालन-पोषण केवल विशेषज्ञ सलाह से नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, समझ और माता-पिता, शिक्षकों व समाज के साझा प्रयास से संभव होता है.
कार्यक्रम के अंत में पुस्तक प्रेमियों ने लेखकों से सीधे संवाद किया और पुस्तक को लेकर उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया दी. यह आयोजन जयपुर में समकालीन पेरेंटिंग, मानसिक स्वास्थ्य और संवेदनशील संवाद पर एक सार्थक और प्रेरणादायक विमर्श के रूप में याद किया गया.