AI युग में ‘इंटेलिजेंस ग्रिड’ का बिगुल: जियो बोले—यह अपग्रेड नहीं, पूरी इकोनॉमी का रीसेट

AI युग में ‘इंटेलिजेंस ग्रिड’ का बिगुल: जियो बोले—यह अपग्रेड नहीं, पूरी इकोनॉमी का रीसेट

 Ananya soch: Telecom Innovation

अनन्य सोच। AI Revolution: Mobile World Congress में वैश्विक टेक मंच से Jio Platforms Limited के ग्रुप सीईओ Mathew Oommen  ने ऐलान किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दौर टेलीकॉम सेक्टर के लिए महज टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था और बिज़नेस मॉडल का “कंप्लीट रीसेट” है. (Jio Platforms) ओमेन ने कहा कि दुनिया अब “मिनट्स और बाइट्स” की इकोनॉमी से आगे बढ़कर “टोकन्स और इंटेलिजेंस” की नई अर्थव्यवस्था में प्रवेश कर रही है. इंडस्ट्रियल एरा प्रोडक्शन पर आधारित था, इंटरनेट एरा ने कनेक्टिविटी और क्लाउड दिया, लेकिन AI एरा आर्थिक समीकरण ही बदल देगा. “यह अपग्रेड साइकिल नहीं, पूर्ण बदलाव है,” उन्होंने स्पष्ट किया. जियो का विजन खुद को केवल नेटवर्क प्रोवाइडर के रूप में नहीं, बल्कि “इंटेलिजेंस ग्रिड” के बिल्डर के रूप में स्थापित करना है. टेलीकॉम की करेंसी पहले वॉयस मिनट्स थी, फिर डेटा बाइट्स बना, और अब भविष्य AI टोकन्स का होगा—जहां AI कम्प्यूटेशन, मॉडल इंफरेंस, ऑटोमेटेड डिसीजन और मशीन-टू-मशीन इंटरैक्शन जैसी सेवाएं शामिल होंगी. ओमेन ने याद दिलाया कि जियो ने भारत में वॉइस कॉलिंग को मुफ्त कर डेटा की कीमत 9 सेंट प्रति जीबी तक लाई, जिससे 52.5 करोड़ से अधिक यूजर्स तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंची. अब अगला लक्ष्य “सबसे कम लागत पर टोकन-पर-वॉट” उपलब्ध कराना है, यानी बड़े पैमाने पर किफायती इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना. उन्होंने ‘AI कमांड आर्किटेक्चरल फ्रेमवर्क’ का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य का नेटवर्क यूनिफाइड, इंटीग्रेटेड और रियल-टाइम निर्णय लेने में सक्षम होगा. उनके अनुसार, टेक्नोलॉजी लीडरशिप ही आगे चलकर आर्थिक और राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगी.