‘मांड की मलिका’ की आवाज हुई खामोश: Gavri Devi Rao के निधन से Rajasthan Folk Music जगत शोकाकुल, Governor Haribhau Bagde ने जताया गहरा दुख
करीब आठ दशक तक Mand Singing Tradition को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली राजस्थान की प्रसिद्ध लोक गायिका Gavri Devi Rao अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उनके निधन से Rajasthan Folk Music जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। राज्यपाल Haribhau Bagde ने इसे राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
अनन्य सोच। राजस्थान की लोक संस्कृति और Mand Folk Music की पहचान बन चुकीं सुप्रसिद्ध मांड गायिका Gavri Devi Rao का निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही प्रदेशभर के लोक कलाकारों, संस्कृति प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में शोक की लहर फैल गई। करीब आठ दशकों तक अपनी मधुर आवाज और लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए समर्पित रहीं गवरी देवी ने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
राज्यपाल Haribhau Bagde ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि गवरी देवी ने Mand Singing की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अतुलनीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि वे मांड गायन की महानतम कलाकारों में शामिल थीं और उनका निधन कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
बाड़मेर जिले के कोरण गांव में एक लोक कलाकार परिवार में जन्मी गवरी देवी ने पाली को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय Rajasthani Folk Culture, लोक संगीत और कलाकारों के हितों के लिए समर्पित किया। उनकी गायकी में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू, लोक जीवन की संवेदनाएं और परंपराओं की गहराई झलकती थी।
उनके निधन की सूचना मिलते ही पाली के गवरी नगर स्थित निवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। लोक कलाकारों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने पहुंचकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। शुक्रवार दोपहर सर्वोदय नगर स्थित मोक्षधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
गवरी देवी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनके गीत और Rajasthan Folk Heritage को संजोने का उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।