अब स्कूल में कैमरा उठाने से पहले सोचें! बिना Permission Entry बैन, छात्राओं की फोटो खींची तो सीधा POCSO केस

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब बाहरी लोगों की एंट्री और Photo-Video Recording को लेकर सख्ती बढ़ गई है। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति स्कूल में कोई प्रवेश नहीं कर सकेगा। सबसे बड़ी बात—अगर किसी ने Minor Girls की तस्वीर या वीडियो बनाकर सार्वजनिक की, तो सीधा POCSO Act के तहत कार्रवाई होगी। जानिए पूरा आदेश।

Aug 18, 2026 - 10:04
Aug 18, 2026 - 10:21
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अब स्कूल में कैमरा उठाने से पहले सोचें! बिना Permission Entry बैन, छात्राओं की फोटो खींची तो सीधा POCSO केस

अनन्य सोच। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में Security और Child Privacy को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है। अब स्कूल परिसर में किसी भी बाहरी व्यक्ति की एंट्री और गतिविधि बिना अनुमति संभव नहीं होगी। खास तौर पर Minor Girls की फोटो-वीडियो बनाने या उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।

आदेश के मुताबिक स्कूल में सुरक्षा, निजता और पढ़ाई का माहौल बनाए रखना अब पूरी तरह प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी होगी। अगर कोई बाहरी व्यक्ति बिना इजाजत परिसर में घुसता है या विद्यार्थियों की फोटो-वीडियो बनाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सीधी कार्रवाई हो सकती है।

अब बिना Permission नहीं मिलेगी School में Entry

नए आदेश के अनुसार बिना पूर्व अनुमति किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश नहीं मिलेगा। स्कूल आने वाले हर व्यक्ति को अब Visitor Register में अपनी पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी।

इतना ही नहीं, बाहरी व्यक्ति को कक्षा, लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल, खेल मैदान या किसी भी स्टूडेंट एक्टिविटी वाले इलाके में बिना इजाजत जाने की छूट नहीं होगी। यानी अब स्कूल कैंपस में हर कदम पर Entry Protocol फॉलो करना अनिवार्य होगा।

Photo-Video और Live Streaming पर लगी रोक

शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की Photography, Videography, Interview, Audio Recording और Live Streaming को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब प्रधानाचार्य की लिखित अनुमति के बिना किसी भी छात्र, शिक्षक या स्कूल गतिविधि की फोटो-वीडियो बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

सबसे अहम बात यह है कि Minor Girls की तस्वीर लेना या उनसे जुड़ी पहचान वाली जानकारी सार्वजनिक करना अब गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। आदेश में साफ लिखा है कि हालात के मुताबिक ऐसी हरकत POCSO Act, 2015 और IT Act के तहत कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकती है।

पकड़े जाने पर सीधे Police के हवाले

अगर कोई व्यक्ति स्कूल परिसर में बिना अनुमति फोटो-वीडियो बनाता पकड़ा गया या इससे कोई विवाद खड़ा हुआ, तो प्रधानाचार्य को तुरंत Police और संबंधित अधिकारियों को सूचित करना होगा।

यही नहीं, अगर किसी व्यक्ति की मौजूदगी से स्कूल की Security, Discipline या Educational Environment पर असर पड़ता दिखे, तो प्रधानाचार्य उसे परिसर में घुसने से सीधे मना कर सकते हैं।

बच्चों की पहचान छुपाना भी अनिवार्य

आदेश में Child Privacy को खास तवज्जो दी गई है। बिना अनुमति किसी भी बच्चे की पहचान उजागर करना प्रतिबंधित रहेगा। यानी फोटो-वीडियो के साथ नाम, कक्षा या कोई भी ऐसी जानकारी शेयर नहीं की जा सकेगी, जिससे बच्चे की पहचान सामने आ जाए।

आदेश के बीच उठे कुछ बड़े सवाल

इस सख्ती के बीच कुछ सवाल भी खड़े हो गए हैं। अगर सरकारी स्कूलों की टूटी छत, शिक्षकों की कमी या बुनियादी सुविधाओं की कमी को मीडिया के सामने उजागर किया जाए, तो क्या वहां भी यही नियम लागू होंगे? क्या आने वाले समय में यह व्यवस्था बाकी सरकारी संस्थानों में भी लागू की जाएगी?

फिलहाल इतना तय है कि शिक्षा विभाग ने Minor Students की Safety और Privacy को सबसे ऊपर रखते हुए स्कूलों में एंट्री से लेकर कैमरे के इस्तेमाल तक हर चीज पर Permission को अनिवार्य कर दिया है।