पहले स्कूली बच्चों ने मचाया धमाल, फिर गुरुओं ने बांधा समां; जयपुर कथक फाउंडेशन के मंच पर दिखी गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल
एक तरफ नन्हे कदमों की सधी हुई पदचाप, दूसरी तरफ दशकों की साधना से निखरी लयकारी। जयपुर कथक फाउंडेशन के पहले महोत्सव ने साबित कर दिया कि जब वरिष्ठ और युवा एक ही मंच साझा करते हैं तो कला की असली परंपरा जीवंत हो उठती है।
अनन्य सोच। जयपुर शहर में कथक नृत्य कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के मकसद से बनाई गई जयपुर कथक फाउंडेशन ने अपने पहले कथक महोत्सव के जरिए एक अनूठी शुरुआत की है। फाउंडेशन की खास बात यह है कि इसकी समिति में कथक जगत के दिग्गज और वरिष्ठ गुरुओं को शामिल किया गया है, और मंशा यह है कि इन्हीं बड़े कलाकारों के मंच पर युवा प्रतिभाओं को भी अपनी कला दिखाने का मौका मिले। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए महोत्सव की शुरुआत युवा कलाकारों के प्रदर्शन से हुई, जिसके बाद गुरु मंजिरी किरण महाजनी और वरिष्ठ नृत्य गुरु डॉ. ज्योति भारती गोस्वामी की प्रस्तुतियों ने पूरी शाम को कथक के रंगों में रंग दिया।
कार्यक्रम इंद्रलोक स्थित निर्मल कुमार कपूर चंद पाटनी सभागार, भट्टारकजी की नसियां में आयोजित हुआ। इसका शुभारंभ डॉ. मृदुल भसीन के स्वागत भाषण से हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पद्मभूषण पंडित विश्वमोहन भट्ट मौजूद रहे, जिनका सम्मान फाउंडेशन के अध्यक्ष और राजस्थान हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधांशु कासलीवाल ने किया। दीप प्रज्वलन की रस्म पंडित विश्वमोहन भट्ट, सुधांशु कासलीवाल, नृत्य गुरु डॉ. शशि सांखला, डॉ. गीता रघुवीर और विदुषी प्रेरणा श्रीमाली के हाथों संपन्न हुई। फाउंडेशन से जुड़े तमाम वरिष्ठ गुरु भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
सबसे पहले मंच महावीर स्कूल कथक प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को दिया गया। इन बाल कलाकारों ने अपनी लयबद्ध पदचाप और भावभंगिमाओं से यह दिखा दिया कि उन्होंने कितनी मेहनत से तैयारी की है। बाद में इन विद्यार्थियों और उनके साथ संगत करने वाले कलाकारों को भी सम्मानित किया गया।
इसके बाद बारी आई गुरु मंजिरी किरण महाजनी की, जिन्होंने कृष्ण वंदना से अपनी प्रस्तुति शुरू करते हुए झपताल में कई खास बंदिशें पेश कीं। द्रुत तीनताल में पंडित विश्वमोहन भट्ट से मिले आशीर्वाद स्वरूप तिहाइयों ने प्रस्तुति में जान डाल दी, और समापन एक भजन से हुआ। उनके साथ पखावज, गायन, तबला और सितार पर कई कलाकारों ने संगत की।
वहीं वरिष्ठ गुरु डॉ. ज्योति भारती गोस्वामी ने शिव स्त्रोत से शुरुआत करते हुए जयपुर घराने की खास लयकारी दिखाई। उनकी प्रस्तुति ‘सावन की सांझ’ में विरह में डूबी नायिका की भावदशा को इतनी खूबसूरती से दर्शाया गया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम का समापन विदुषी प्रेरणा श्रीमाली के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।