"भाई नहीं है मेरा, इसलिए कान्हा ही मेरे भैया हैं" — 10 साल की मासूम की बात ने जीता हर दिल
अनन्य सोच। शहर के जवाहर कला केंद्र में इन दिनों एक ऐसी Art Exhibition लगी है, जो सिर्फ रंगों और कैनवास की कहानी नहीं, बल्कि दिल को छू लेने वाली भावनाओं की भी गवाह बन रही है। यहां सुकृति कला दीर्घा में भगवान गणेश और श्रीकृष्ण पर आधारित एक भव्य प्रदर्शनी सजाई गई है, जिसमें एक छोटी बच्ची की बात ने सबका ध्यान खींच लिया।
गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी पर सजी अनूठी कला प्रदर्शनी
"अतिशय कलित संस्थान" द्वारा आयोजित यह Two-Day Exhibition 12 और 13 सितंबर तक चली, जिसका विधिवत उद्घाटन महाराजा कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रोफेसर सरीना कालिया के हाथों हुआ। इस मौके पर शहर के कई गणमान्य लोग और कला प्रेमी मौजूद रहे और उन्होंने बच्चों से लेकर बड़े कलाकारों तक की रचनात्मकता की सराहना की।
10 साल की रोहिता की बात ने भावुक कर दिया सबको
प्रदर्शनी के दौरान जब प्रो. सरीना कालिया ने पांचवीं कक्षा की छात्रा रोहिता शर्मा से उनकी पेंटिंग के बारे में पूछा, तो उनका जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। रोहिता ने बताया कि उनका कोई भाई नहीं है, इसलिए वे श्रीकृष्ण को ही अपना भाई मानती हैं और इसी भावना के साथ उन्होंने यह पेंटिंग बनाई। उनकी यह मासूम बात प्रदर्शनी की सबसे खास कहानी बन गई।
75 पेंटिंग्स, अलग-अलग शैलियां, एक ही आध्यात्मिक भाव
इस Group Exhibition की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि भगवान गणेश और श्रीकृष्ण को किसी एक निश्चित शैली में नहीं बांधा गया। देशभर के 35 Artists ने अपनी अलग-अलग रचनात्मक तकनीकों से कुल 75 पेंटिंग्स तैयार कीं, जिनमें दीप्ति ढुकिया, नंदिनी सोनी, रेणु विजय सिंह और सोनिका मित्तल जैसे अनुभवी कलाकारों के साथ-साथ जियान तोतला, रिया पारीक, आरव पाण्डे और कायरा माथुर जैसे Child Artists की कृतियां भी शामिल रहीं।
दर्शकों को मिला आध्यात्मिक और कलात्मक अनुभव
कलाविद डॉ. रीटा प्रताप के प्रयासों से आयोजित यह प्रदर्शनी दर्शकों को एक अलग ही Spiritual Experience दे रही थी। हर पेंटिंग में गजानन की भव्यता और कान्हा की मनमोहक लीलाओं को बड़ी बारीकी से उकेरा गया था, जिससे पूरी कला दीर्घा भक्ति और सृजनात्मकता के अनूठे संगम से सजी नजर आ रही थी।