Sanskrit Education Rajasthan: संस्कृत शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर, ताम्रपत्र होंगे डिजिटल
राजस्थान में संस्कृत शिक्षा के संरक्षण और विस्तार को लेकर समीक्षा बैठक हुई। इसमें ताम्रपत्रों के डिजिटल रिकॉर्ड, राष्ट्रीय कार्यशालाओं और संस्कृत शिक्षा को रोजगार व करियर से जोड़ने पर जोर दिया गया।
अनन्य सोच । Sanskrit Education Rajasthan: राजस्थान में संस्कृत भाषा और शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ इसके ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की दिशा में भी काम किया जाएगा। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में संस्कृत शिक्षा की प्रगति, ताम्रपत्रों के डिजिटल रिकॉर्ड और विद्यार्थियों के लिए रोजगार व करियर से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई।
संस्कृत धरोहर को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की तैयारी
मुख्य सचिव ने संस्कृत को देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने संस्कृत भाषा में उपलब्ध ताम्रपत्रों का व्यवस्थित कैटलॉग तैयार करने और उनका डिजिटल रूपांतरण करने को कहा। इससे ऐतिहासिक सामग्री को सुरक्षित रखने और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय स्तर पर होंगी संस्कृत कार्यशालाएं
बैठक में संस्कृत के अध्ययन, अनुसंधान और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित करने पर भी जोर दिया गया। इनमें प्रदेश और देश के प्रमुख विद्वानों एवं विशेषज्ञों को आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए, ताकि संस्कृत से जुड़े विषयों पर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श हो सके।
रोजगार और करियर से जोड़ी जाएगी संस्कृत शिक्षा
मुख्य सचिव ने संस्कृत विद्यालयों में चल रहे कार्यक्रमों और पढ़ाए जा रहे विषयों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को विद्यार्थियों के रोजगार और करियर के अवसरों से जोड़ने पर ध्यान दिया जाए। विद्यार्थियों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए।
पीएम श्री की तर्ज पर कार्यशाला का प्रस्ताव
मुख्य सचिव ने पीएम श्री विद्यालयों की तर्ज पर प्रधानाचार्यों एवं प्राचार्यों को आमंत्रित कर संस्कृत भाषा पर कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाना और इसे शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
बैठक में जगतगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु मदन मोहन झा, रजिस्ट्रार गुंजन सोनी, संस्कृत शिक्षा विभाग की आयुक्त प्रियंका जोधावत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।