Diwali Vastu Tips: पूर्वमुखी घर में पीली, दक्षिणमुखी में लाल झालर जलाएं, जानें दिशा के अनुसार शुभ रोशनी

ज्योतिषाचार्य के अनुसार दिशा के हिसाब से बल्बों का रंग चुनें। जानें Lakshmi Puja की दिशा, मांडणे, दीपक जलाने के स्थान और पटाखों से जुड़े Vastu नियम।

Nov 7, 2026 - 22:41
Nov 7, 2026 - 22:46
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Diwali Vastu Tips: पूर्वमुखी घर में पीली, दक्षिणमुखी में लाल झालर जलाएं, जानें दिशा के अनुसार शुभ रोशनी

अनन्य सोच । बिना रोशनी के दीपावली अधूरी मानी जाती है। दीयों के साथ अब छोटे बल्बों की झालर भी घर की सुंदरता बढ़ाती है। एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अगर Diwali Decoration के दौरान Vastu Shastra का ध्यान रखा जाए तो अधिक लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि घर और प्रतिष्ठान की दिशा के अनुसार रोशनी का चयन शुभ परिणाम देता है।

दिशा के अनुसार चुनें Lighting का रंग

 पूर्वमुखी भवन और दुकानों में पीले रंग के बल्बों की संख्या अधिक और नीले रंग के बल्बों की संख्या कम रखनी चाहिए। दक्षिणमुखी भवन में लाल रंग के बल्ब लगाने चाहिए। पश्चिममुखी भवन में नीले और सफेद रंग के बल्ब अधिक रखने चाहिए, जबकि उत्तरमुखी भवन में सफेद और हरे रंग के बल्ब शुभ माने गए हैं।

दीपावली का महत्व और Vastu का असर

 दीपावली सुख-समृद्धि, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक है। वास्तु शास्त्र में इस अवसर पर घर और प्रतिष्ठान की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, शुभ चिह्नों की सजावट और विधि-विधान से महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि भवन का वास्तु अनुकूल न होने पर आय में रुकावट, अनावश्यक खर्च, बीमारियों पर धन व्यय, उधार दिया पैसा वापस न मिलना और कर्ज जैसी समस्याएं आ सकती हैं। वहीं, वास्तु के सामान्य नियमों का पालन करते हुए महालक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-शांति, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और समृद्धि का वातावरण बनता है।

उनके अनुसार दीपावली पर घरों और प्रतिष्ठानों में रंग-रोगन, सफाई, दीपक और रोशनी से सजावट की जाती है। घर को व्यवस्थित रखने और अनावश्यक सामान हटाने से भी सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायता मिलती है।

Lakshmi Puja की दिशा और मांडणे

उन्होंने बताया कि लक्ष्मी पूजन घर की उत्तर या पूर्व दिशा में करना चाहिए। ऐसा संभव न हो तो पश्चिम दिशा में भी पूजन किया जा सकता है, लेकिन पूजा करते समय मुख उत्तर या पूर्व की ओर रखना चाहिए। पूजन में मिट्टी की लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाएं स्थापित करना शुभ माना जाता है। साथ ही श्री यंत्र और कुबेर यंत्र का पूजन भी किया जा सकता है।

मुख्य द्वार की देहरी, चौक और आंगन में पारंपरिक मांडणे बनाने तथा दरवाजों पर बंधनवार बांधने की परंपरा है। मांडणे बनाने में हिरमच, कली और चूना पाउडर का प्रयोग करना चाहिए। मुख्य द्वार के दोनों ओर लाल कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर उसके आसपास शुभ-लाभ लिखना भी शुभ माना जाता है।

पूजन में रखें ये सावधानियां

दीपावली पर पूजन के समय काले वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। परिवारजनों और मित्रों को मिठाई और उपहार देने चाहिए। जरूरतमंद कन्याओं को मिठाई और कपड़े दान करने से लाभ होता है। उपहार में पटाखे, काले चमड़े की वस्तुएं और सब्जी काटने वाले चाकू जैसी चीजें देने से बचना चाहिए।

इन स्थानों पर जलाएं Diya

ज्योतिषाचार्य के अनुसार घर के मंदिर में लक्ष्मी पूजन स्थल पर, आंगन और मुख्य द्वार की चौखट पर तथा आसपास के मंदिर में दीपक जलाने का विशेष महत्व है। घर के पास पीपल या बेलपत्र का पेड़ हो तो उसके नीचे भी दीपक जलाया जा सकता है। नजदीकी चौराहे पर दीपक जलाने की भी परंपरा है। पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं के अंतर्गत श्मशान में दीपक जलाने की बात कही गई है।

पटाखों के लिए Vastu और सुरक्षा

पटाखे अग्नि तत्व से जुड़े होने के कारण उन्हें सुरक्षित और खुले स्थान पर ही चलाना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में आग्नेय कोण को इसके लिए उपयुक्त माना गया है। ईशान कोण में पटाखे चलाने और वहां अग्नि तत्व बढ़ाने वाली वस्तुएं रखने से बचने की सलाह दी गई है। पटाखे चलाते समय अग्नि सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

नोट: खबर में सभी बातें एक ज्योतिषाचार्य के बयान और दिए गए इनपुट पर आधारित हैं। Vastu से जुड़े दावे धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।