Diwali 2026: शाम 6:16 से 6:28 बजे लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त, रोशनी से जगमगाई छोटीकाशी

ज्योतिषाचार्य डॉ. मिश्रा के अनुसार रविवार को Lakshmi Puja का शुभ मुहूर्त शाम 6:16 से 6:28 और 6:52 से 7:05 बजे तक रहेगा। जानें प्रदोष काल, बही-खाता पूजन और गोवर्धन पूजा की तिथि।

Nov 7, 2026 - 22:49
Nov 7, 2026 - 22:50
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Diwali 2026: शाम 6:16 से 6:28 बजे लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त, रोशनी से जगमगाई छोटीकाशी

अनन्य सोच । धन-धान्य की अधिष्ठात्री महालक्ष्मी को समर्पित दीपावली का महापर्व रविवार को प्रदोष काल में मनाया जाएगा। घर-घर में मां महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और सरस्वती का पूजन कर श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. मिश्रा के अनुसार, Lakshmi Puja Muhurat इस बार विशेष शुभ संयोग में रहेगा।

Lakshmi Puja का शुभ मुहूर्त

डॉ. मिश्रा के अनुसार लक्ष्मी पूजन का विशेष शुभ समय शाम 6:16 से 6:28 बजे और 6:52 से 7:05 बजे तक रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल, स्थिर वृषभ लग्न और कुंभ राशि के स्थिर नवांश का संयोग रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:30 से रात 8:14 बजे तक तथा वृषभ लग्न शाम 6:30 से रात 8:01 बजे तक रहेगा।

चौघड़िया के अनुसार शाम 5:36 से रात 10:32 बजे तक शुभ, अमृत और चर चौघड़िया में भी पूजन किया जा सकेगा।

व्यापारियों के लिए बही-खाता पूजन

व्यापारियों के लिए सिंह लग्न में बही-खाता पूजन की परंपरा है। इसका समय रात 12:34 से 2:50 बजे तक रहेगा।

तैयारियां पूरी, रूप चतुर्दशी पर निखरा रूप

दीपावली के लिए शनिवार को तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। पूरे घर की एक बार फिर सफाई कर धुलाई की गई और घरों को नए अंदाज में सजाया गया। रविवार को रंगोली और मांडणों से घर सजाए जाएंगे।

पंच दिवसीय प्रकाश पर्व के दूसरे दिन शनिवार को रूप चतुर्दशी मनाई गई। धन लक्ष्मी के स्वागत में गृह लक्ष्मियों ने रूप निखारा, इसलिए ब्यूटी पार्लर में महिलाओं की भीड़ रही। मंदिरों में ठाकुरजी का अभ्यंग स्नान, उबटन और श्रृंगार की परंपरा निभाई गई। नरक चतुर्दशी पर घरों में दीपदान भी हुआ। शनिवार को हनुमान मंदिरों में हनुमान जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया, जहां सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ हुए।

10 नवंबर को Govardhan Puja और अन्नकूट

10 नवंबर, मंगलवार को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। घरों और मंदिरों में गोबर से भगवान गिरिराज का प्रतीकात्मक स्वरूप बनाकर पूजा की जाएगी। मंदिरों में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए जाएंगे। इस दिन गौक्रीड़ा और बलिराज पर्व मनाने की भी परंपरा है।

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर सूर्यास्त के समय चंद्र दर्शन और प्रतिपदा तिथि की अवधि को देखते हुए इस वर्ष 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा करना उचित रहेगा। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। यह पर्व प्रकृति संरक्षण और गौसेवा का संदेश देता है।