ऑक्टेव-2026 का आगाज: जयपुर में मंच पर उतरी पूर्वोत्तर की संस्कृति, 15 लोकनृत्यों ने बांधा समां

जयपुर के आरआईसी में पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की संस्कृति पर केंद्रित चार दिवसीय ‘ऑक्टेव-2026’ शुरू हुआ। उद्घाटन पर 15 लोकनृत्य और एथनिक कॉस्ट्यूम शो की प्रस्तुतियां हुईं।

Oct 1, 2026 - 21:48
Oct 1, 2026 - 22:38
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ऑक्टेव-2026 का आगाज: जयपुर में मंच पर उतरी पूर्वोत्तर की संस्कृति, 15 लोकनृत्यों ने बांधा समां
ऑक्टेव-2026 के उद्घाटन पर जयपुर में पूर्वोत्तर के कलाकारों की लोकनृत्य प्रस्तुति

अनन्य सोच । राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में गुरुवार शाम चार दिवसीय ‘ऑक्टेव-2026’ का उद्घाटन हुआ। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से आयोजित इस समारोह में पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के 14 समूहों ने 15 लोकनृत्य रूप प्रस्तुत किए। एथनिक कॉस्ट्यूम शो में पारंपरिक परिधानों की झलक भी दिखी। राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे मुख्य अतिथि रहे।

पूर्वोत्तर के आठ राज्य ‘अष्ट लक्ष्मी’: बागडे

मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को ‘अष्ट लक्ष्मी’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविध लोक परंपराओं, भाषाओं, संगीत, नृत्य, कला, शिल्प और जीवन पद्धतियों में निहित है। उनके अनुसार अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की विशिष्ट पहचान भारत की विरासत को समृद्ध करती है। उन्होंने हस्तशिल्प उत्पाद खरीदकर दस्तकारों को प्रोत्साहित करने का आह्वान भी किया।

समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने की। उन्होंने ‘विविधता में एकता’ के साथ ‘एकता में विविधता’ के दर्शन को आत्मसात करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे शरीर के अंग अलग होते हुए भी देह से पृथक अस्तित्व नहीं रखते, वैसे ही भारत की विविध संस्कृतियां साझा सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी हैं।

15 नृत्य रूपों में दिखा सांस्कृतिक वैभव

प्रो. तरुण प्रधान के निर्देशन में हुई कोरियोग्राफिक प्रस्तुति में कहीं गले में ढोल लटकाए मणिपुर के नर्तक कलाबाजियां करते दिखे, तो कहीं सिर पर बोतल और दीपक का संतुलन साधते त्रिपुरा के कलाकार। सिक्किम के कलाकारों ने हिम शेर की वेशभूषा में अपनी संस्कृति को साकार किया।

अरुणाचल प्रदेश से ताई खेमती ‘पिकॉक डांस’ और जुजु-जाजा, मणिपुर से पुंग चोलम, थांगटा और लाई हारोबा, त्रिपुरा से होजागिरी और ममिता तथा सिक्किम से तमंग सेलो और सिंघी छम की प्रस्तुति हुई। मेघालय के वांगला, असम के बारदोई सिखा और बिहू, मिजोरम के चेराव और सरलामकाई तथा नागालैंड के वार डांस को भी दर्शकों की खूब सराहना मिली।

हैंडमेड परिधानों में ‘सेवन सिस्टर्स एंड वन ब्रदर’ की झलक

भानुश्री दास के निर्देशन में हुए एथनिक कॉस्ट्यूम शो में आठों राज्यों के पारंपरिक परिधान आकर्षण का केंद्र रहे। युवक-युवतियों ने जोड़ों में मंच पर आकर हस्तनिर्मित परिधानों की विविधता दिखाई। अंत में सभी मॉडल एक साथ मंच पर उतरे।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक डॉ. अश्विन महेश दलवी ने अतिथियों का स्वागत किया और ‘ऑक्टेव-2026’ की रूपरेखा साझा की। समारोह में आरआईसी निदेशक निहाल चंद गोयल, सांसद मंजू शर्मा और विधायक गोपाल शर्मा भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और डॉ. दलवी की सराहना की और केंद्र के पूर्व निदेशक फुरकान खान के योगदान का उल्लेख भी किया।