Sindoor Khela 2026: जयपुर में शक्ति फाउंडेशन ने मनाया 8वां आयोजन, महिलाओं ने दिया Sisterhood का संदेश
Jaipur के होटल ग्रैंड उनियारा में Shakti Foundation ने 8वां Sindoor Khela मनाया। कोलकाता से आई eco-friendly मां दुर्गा की मूर्ति और women entrepreneurs के स्टॉल रहे आकर्षण।
अनन्य सोच । जयपुर के महिला संगठन शक्ति फाउंडेशन ने सोमवार शाम होटल ग्रैंड उनियारा में 8वां Sindoor Khela आयोजित किया। कार्यक्रम की शुरुआत इस परंपरा और इसके महत्व की जानकारी से हुई, जिसके बाद विधिवत पूजा हुई। बंगाल की पारंपरिक लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी में सजी महिलाओं ने पहले मां दुर्गा को पान के पत्ते से सिंदूर अर्पित किया, फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर रस्म निभाई। आयोजन के लिए कोलकाता से मां दुर्गा की eco-friendly मूर्ति, पारंपरिक वस्त्र और पूजा के थाल मंगवाए गए थे।
आरती, मिठाई और नृत्य से सजी शाम
रस्म के दौरान महिलाओं ने एक-एक कर मां दुर्गा की आरती की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और नृत्य किया। कार्यक्रम में विवाहित के साथ अविवाहित महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। फाउंडर सोनाक्षी वशिष्ठ, को-फाउंडर शैलजा शर्मा और शिखा मेहरा सहित डॉ. सुप्रिया गुप्ता, निमिषा गुप्ता, मुंबई से निधि तोमर, रश्मि बहेती, श्रुति लूथरा, युक्ति शर्मा और चेताली सेन गुप्ता मौजूद रहीं।
Inclusivity और Sisterhood पर जोर
सोनाक्षी वशिष्ठ ने कहा कि फाउंडेशन के लिए यह केवल धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि अलग-अलग वर्गों की महिलाओं को एक मंच पर लाकर नारी शक्ति, inclusivity और sisterhood को बढ़ावा देने का अवसर है। उनके अनुसार समय के साथ यह आयोजन महिलाओं के मेल-मिलाप और एकजुटता का मंच बन गया है।
Women Entrepreneurs को मिला मंच
फाउंडेशन की पहल के तहत इस बार भी युवा महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला। राधिका पंचोली ने अपने स्टार्टअप 'जयपुरोमा' के luxury perfumes, संस्कृति शर्मा और नीरल शर्मा ने 'गिफ्ट हैम्पर्स' ब्रांड के scented candles, जबकि स्मिता अग्रवाल ने सूट मटेरियल के स्टॉल लगाए।
क्या है Sindoor Khela?
दुर्गा पूजा के अंतिम दिन बंगाली समुदाय में यह रस्म निभाई जाती है। मान्यता है कि देवी दुर्गा अपने चार बच्चों के साथ मायके आती हैं और अंतिम दिन उन्हें विदा किया जाता है। सिंदूर अर्पित करने से पहले उनके गालों को पान के पत्तों से पोंछा जाता है, फिर मांग और चूड़ियों पर सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मिठाई खिलाती हैं।