जयपुर में Papankusha Ekadashi की धूम: गोविंददेवजी सहित प्रमुख मंदिरों में विशेष Shringar, भक्तों ने किया Vishnu Sahasranama पाठ
जयपुर में गुरुवार को Papankusha Ekadashi श्रद्धा से मनाई गई। गोविंददेवजी समेत प्रमुख मंदिरों में विशेष झांकियां सजीं, भक्तों ने व्रत रखा और भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की।
अनन्य सोच । जयपुर में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी Papankusha Ekadashi के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। श्रद्धालुओं ने Ekadashi Vrat रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। सुख-समृद्धि, आत्मशुद्धि और मोक्ष की कामना के साथ विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया गया।
गोविंददेवजी मंदिर में विशेष Shringar
आराध्य देव Govind Dev Ji Temple में महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक हुआ। इसके बाद उन्हें लाल रंग की पोशाक धारण कराई गई। ऋतु पुष्पों और चंदन से श्रृंगार किया गया, जबकि झांकी में गोचारण लीला के भाव को दर्शाया गया।
शहर के अन्य मंदिरों में उत्सव
पुरानी बस्ती के राधा गोपीनाथजी मंदिर में महंत सिद्धार्थ गोस्वामी और चौड़ा रास्ता के राधा-दामोदरजी मंदिर में महंत मलय गोस्वामी के सान्निध्य में उत्सव मनाया गया। पानों का दरीबा स्थित श्री सरस निकुंज में पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में श्री राधा सरस बिहारी जू सरकार का वेदोक्त मंत्रोच्चार से अभिषेक हुआ। रामगंज बाजार के लाड़लीजी मंदिर में महंत डॉ. संजय गोस्वामी के सान्निध्य में एकादशी के पदों का गायन हुआ। इस्कॉन, गुप्त वृंदावन धाम, मुरली मनोहर जी, बृज निधि जी, आनंद कृष्ण बिहारी जी और विनोदी लाल जी सहित कई मंदिरों में भक्तों ने दर्शन किए।
पद्मनाभ स्वरूप की पूजा और दान
इस अवसर पर भगवान विष्णु के Padmanabha स्वरूप की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मंत्र-जप, भजन-कीर्तन और सहस्रनाम पाठ के साथ आराधना की। पुण्य लाभ की कामना से गौ, अन्न, जल, वस्त्र और छत्र का दान किया गया। मंदिरों के बाहर बैठे लोगों को भोजन के पैकेट भी बांटे गए।
धार्मिक मान्यता
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस एकादशी का नाम पापरूपी हाथी को पुण्यरूपी अंकुश से नियंत्रित करने के प्रतीकात्मक भाव से जुड़ा है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत का महत्व बताया था। मान्यता है कि इस दिन विष्णु आराधना और व्रत से पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।