Vijayadashami 2026: 20 अक्टूबर को Guru Ucch और Shravan Nakshatra का संयोग, जानें Aparajita-Shami Puja का महत्व
Vijayadashami 20 अक्टूबर 2026 को मंगलवार के दिन मनेगी। जानें Vijay Muhurat, Aparajita-Shami Puja, Shastra Pujan और रावण के दस सिरों का प्रतीकात्मक अर्थ।
अनन्य सोच । आश्विन शुक्ल दशमी पर मनाई जाने वाली Vijayadashami इस बार मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इस दिन अपराजिता, शमी, शस्त्र और आयुध पूजन की परंपरा निभाई जाएगी।
ग्रहों का खास संयोग और Vijay Muhurat
ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दिन गुरु कर्क राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे और Shravan Nakshatra का संयोग बनेगा। गुरु 31 अक्टूबर तक कर्क राशि में रहेंगे। ज्योतिष में मंगल को साहस और संकल्प शक्ति का कारक, जबकि गुरु को ज्ञान, धर्म और सद्बुद्धि का प्रतीक माना गया है। श्रवण नक्षत्र के देवता भगवान विष्णु हैं, जिसका संबंध सीखने और ज्ञान से जोड़ा जाता है।
इस दिन Vijay Muhurat रहेगा, जिसे परंपरागत रूप से शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त माना जाता है। मान्यता है कि नए कार्य, शिक्षा, व्यवसाय, यात्रा या किसी बड़े लक्ष्य के लिए इस समय संकल्प लिया जा सकता है।
Aparajita और Shami Puja का महत्व
अपराजिता का अर्थ है, जिसे पराजित न किया जा सके। मान्यता के अनुसार अपराह्न काल में अपराजिता पूजन शुभ माना जाता है। पूजा में पुष्प, अक्षत, कुमकुम, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।
शमी पूजा भी इस पर्व का प्रमुख अनुष्ठान है। महाभारत की परंपरा के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे और समय पूरा होने पर वापस लिए थे। इसी प्रसंग से शमी पूजा और शस्त्रों के सम्मान की परंपरा जुड़ी है।
शहर में कहां होगा Shastra Pujan
इस दिन आयुध और शस्त्र पूजा का भी विधान है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से अलग-अलग स्थानों पर पथ संचलन निकाले जाएंगे और शाखा स्थानों पर शस्त्र पूजन होगा। सिटी पैलेस, राजपूत सभा भवन और क्षत्रिय संघ कार्यालय सहित कई स्थानों पर भी शस्त्रों का पूजन किया जाएगा।
रावण के दस सिरों से सीख: Self-Reflection का अवसर
रावण दहन सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, आत्ममंथन का मौका भी है। रावण के दस सिर काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, स्वार्थ, अन्याय, अमानवीयता और अहंकार जैसे विकारों के प्रतीक माने जाते हैं। इस दिन व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयां छोड़ने और सदाचार अपनाने का संकल्प ले सकता है।
पर्व का मूल संदेश है कि बाहरी जीत के साथ अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों में भी सुधार किया जाए।