टोक्यो में छाया राजस्थान का रंग! बंधेज-लहरिया और ब्लू पॉटरी देख मंत्रमुग्ध हुए जापानी पर्यटक, पूछते रहे बारीकियां
हजारों किलोमीटर दूर जापान की धरती पर राजस्थान की मिट्टी की खुशबू कैसे फैल सकती है? टोक्यो में चल रहे एक बड़े टूरिज्म एक्सपो में इसका जवाब खुद जापानी पर्यटकों ने दिया, जो राजस्थान के रंग-बिरंगे परिधानों और हस्तशिल्प को देखकर सवालों की झड़ी लगाते नजर आए।
अनन्य सोच । जापान टूरिज्म एक्सपो (Tourism Expo Japan) के तीसरे दिन राजस्थान पर्यटन के पवेलियन जी-38 पर जापानी पर्यटकों और पर्यटन कारोबारियों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। यहां प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र परंपराओं ने विदेशी मेहमानों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
बंधेज-लहरिया और छपाई कला ने बटोरी वाहवाही
आगंतुकों में खासतौर पर बंधेज, लहरिया, सांगानेरी और बगरू प्रिंट (Bagru Print) को जानने की उत्सुकता देखी गई। पर्यटन सचिव शुचि त्यागी के नेतृत्व में संयुक्त निदेशक अजय शर्मा ने जापानी पर्यटकों को इन पारंपरिक कलाओं की बारीकियों से रूबरू कराया।
हाथ से होने वाली छपाई ने किया आकर्षित
अजय शर्मा ने बताया कि सांगानेरी हस्तशिल्प (Sanganeri Handicraft) अपनी हाथ की छपाई के लिए जाना जाता है, तो बगरू पारंपरिक लकड़ी के ब्लॉक और प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल के लिए मशहूर है। जापानी पर्यटकों ने इन शिल्पों की निर्माण प्रक्रिया को लेकर भी गहरी दिलचस्पी दिखाई।
ब्लू पॉटरी बनी कौतूहल का विषय
जयपुर की मशहूर ब्लू पॉटरी (Blue Pottery) भी पवेलियन पर विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अनोखे रंग और बारीक डिजाइन को देखकर जापानी आगंतुक इसकी निर्माण तकनीक के बारे में जानने को उत्सुक नजर आए।
अनुभव आधारित पर्यटन पर जोर
अजय शर्मा ने बताया कि राजस्थान पर्यटन जापानी बाजार में राज्य को ऐसे गंतव्य के रूप में पेश कर रहा है, जहां पर्यटक सिर्फ उत्पाद खरीदने ही नहीं, बल्कि कारीगरों से सीधे संवाद कर शिल्प निर्माण की प्रक्रिया को भी करीब से देख सकते हैं।
जापानी बाजार में बढ़ी राजस्थान की मांग
एक्सपो के तीसरे दिन पवेलियन पर बनी रही सक्रियता और आगंतुकों की लगातार जिज्ञासा ने साफ कर दिया कि राजस्थानी हस्तशिल्प और परिधानों को लेकर जापानी पर्यटन बाजार में रुचि तेजी से बढ़ रही है।