राजस्थान में जहरीली हवा का कहर: खैरथल का AQI 378, जयपुर और भिवाड़ी में भी प्रदूषण से बिगड़े हालात

राजस्थान में Air Pollution का स्तर कई शहरों में चिंताजनक बना हुआ है। खैरथल में AQI 378 के साथ सबसे खराब स्थिति दर्ज की गई। भिवाड़ी, सवाई माधोपुर और जयपुर में भी हवा की गुणवत्ता प्रभावित रही, जबकि डूंगरपुर और राजसमंद में अपेक्षाकृत साफ हवा दर्ज हुई।

Nov 6, 2026 - 20:25
Nov 6, 2026 - 20:26
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राजस्थान में जहरीली हवा का कहर: खैरथल का AQI 378, जयपुर और भिवाड़ी में भी प्रदूषण से बिगड़े हालात

अनन्य सोच । राजस्थान में Air Pollution का स्तर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। प्रदेश के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। शुक्रवार शाम 4 बजे जारी Air Quality Index (AQI) के आंकड़ों के अनुसार खैरथल में सबसे अधिक 378 AQI दर्ज किया गया। वहीं भिवाड़ी, सवाई माधोपुर और राजधानी जयपुर में भी प्रदूषण का असर देखने को मिला। प्रदेश के 50 मॉनिटरिंग केंद्रों पर दर्ज आंकड़े अलग-अलग शहरों की वायु गुणवत्ता में बड़ा अंतर दिखा रहे हैं।

खैरथल और भिवाड़ी में सबसे ज्यादा प्रदूषण

प्रदेश में खैरथल की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित दर्ज हुई। यहां AQI 378 रहा, जो Very Poor श्रेणी में आता है। औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में औसत AQI 335 दर्ज किया गया। यहां RIICO Industrial Area में 355 और वसुंधरा कॉलोनी में 314 का स्तर रिकॉर्ड हुआ। सवाई माधोपुर में भी AQI 306 रहा, जो बेहद खराब वायु गुणवत्ता का संकेत है।

जयपुर की हवा भी खराब श्रेणी में

राजधानी जयपुर में औसत AQI 207 दर्ज हुआ। शहर के अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर अलग रहा। RIICO क्षेत्र में 286, मानसरोवर में 283 और शास्त्री नगर में 207 AQI रिकॉर्ड किया गया। आदर्श नगर में 105 के साथ तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति रही।

बीकानेर, सीकर और अन्य जिलों में भी प्रदूषण

बीकानेर में AQI 273, सीकर में 227, नागौर में 225, झुंझुनूं में 224 और करौली में 215 दर्ज किया गया। इन शहरों में हवा खराब श्रेणी में रही। जोधपुर का औसत AQI 192 और कोटा का 145 रहा।

डूंगरपुर और राजसमंद में राहत

प्रदेश के कुछ जिलों में हवा की स्थिति बेहतर रही। डूंगरपुर में AQI 77 और राजसमंद में 85 दर्ज किया गया। वहीं उदयपुर का AQI 129 रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजस्थान में वायु प्रदूषण का असर सभी शहरों में एक जैसा नहीं है। लोगों को प्रदूषण के स्तर के अनुसार बाहरी गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।