कुल्लू से दुबई तक पहुंचा सिंदूरी अनार: APEDA की मदद से 1.3 मीट्रिक टन Export, 600 किसानों को फायदा

APEDA ने हिमाचल के कुल्लू से दुबई तक 1.3 मीट्रिक टन Sindoori Pomegranate Export में मदद की। भुंतर FPO से जुड़े करीब 600 किसानों को घरेलू बाजार से 50 प्रतिशत अधिक दाम मिले।

Nov 3, 2026 - 22:30
Nov 3, 2026 - 22:51
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कुल्लू से दुबई तक पहुंचा सिंदूरी अनार: APEDA की मदद से 1.3 मीट्रिक टन Export, 600 किसानों को फायदा

अनन्य सोच । वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से संयुक्त अरब अमीरात के दुबई तक 1.3 मीट्रिक टन सिंदूरी अनार के निर्यात में मदद की है। PIB की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, खेप में दो-दो किलो के 650 डिब्बे शामिल हैं।

किसानों से सीधी खरीद, FPO की भागीदारी

इस खेप का निर्यात उत्तर प्रदेश की कंपनी अमामा एक्सपोर्ट्स ने किया। अनार सीधे स्थानीय किसानों और भुंतर किसान उत्पादक संगठन (FPO) से खरीदे गए, जिससे करीब 600 किसान जुड़े हैं। कुल्लू जिला बागवानी प्रशासन ने खरीद और समन्वय में सहयोग किया। जानकारी के मुताबिक, इस निर्यात से किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक दाम मिले।

सिंदूरी अनार की खासियत

हिमाचल प्रदेश में भगवा और कंधारी के साथ सिंदूरी अनार भी उगाया जाता है। आकर्षक लाल त्वचा, रसीले दानों और मीठे-खट्टे स्वाद वाला यह अनार ताजे फल के रूप में खाने और निर्यात, दोनों के लिए उपयुक्त बताया गया है।

UAE बाजार में अवसर

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने APEDA के अंतर्गत आने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का लगभग 2.59 अरब डॉलर का निर्यात UAE को किया। इसकी कुल मात्रा करीब 38.10 लाख मीट्रिक टन रही। खरीदारों की मांग, गुणवत्ता जरूरतों और आयात नियमों के आधार पर हिमाचल के बागवानी उत्पादों के लिए भी इस बाजार में अवसर हैं।

सेब से आगे बढ़ेगा हिमाचल का निर्यात

APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव ने खेप को रवाना किया। कार्यक्रम में अधिकारी, बागवानी विभाग के प्रतिनिधि, निर्यातक, FPO और किसान मौजूद रहे। बताया गया कि इस पहल से हिमाचल के कृषि निर्यात में सेब के अलावा अन्य उत्पाद जुड़ने को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में जापानी फल, गुठलीदार फल, जूस और रेडी-टू-ईट उत्पादों के निर्यात की भी संभावनाएं बताई गई हैं। गुणवत्ता प्रबंधन, बाजार से जुड़ाव और निर्यात नियमों के पालन पर ध्यान देकर किसानों के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।