"पहले सरपंच, फिर मुख्यमंत्री": CM Bhajanlal Sharma ने पंचायत प्रतिनिधियों को क्यों दी 'छोटी समस्या' पर ध्यान देने की सीख
गांधी जयंती पर जयपुर में हुए Panchayati Raj संवाद में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सरपंचों से कहा कि गांव की कोई भी समस्या छोटी नहीं होती। उन्होंने अपने सरपंच कार्यकाल का अनुभव भी साझा किया।
अनन्य सोच । गांव का आदमी मुसीबत में सबसे पहले किसके पास जाता है? मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मुताबिक, अपने सरपंच के पास। गांधी जयंती पर जयपुर के तक्षशिला ऑडिटोरियम में हुए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि संवाद कार्यक्रम में उन्होंने Sarpanch और Gram Panchayat की भूमिका पर खुलकर बात की।
"भारत की आत्मा गांवों में"
मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। उन्होंने ग्राम पंचायत को ग्रामीण व्यवस्था की सबसे छोटी, पर सबसे मजबूत इकाई बताया। उनका कहना था कि केंद्र और राज्य की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में पंचायत प्रतिनिधियों की अहम भूमिका है।
"समस्या छोटी है, यह सोचकर टालें नहीं"
CM ने कहा कि किसान, मजदूर, गरीब और दिव्यांग के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि उम्मीद का पहला दरवाजा होता है। जो बात बाहर से छोटी लगे, वह किसी ग्रामीण के लिए बड़ी हो सकती है। उन्होंने प्रतिनिधियों से जनता के भरोसे को बनाए रखने की अपील की।
जब CM ने सुनाया अपना सरपंच वाला किस्सा
भजनलाल शर्मा ने बताया कि वे खुद भी सरपंच रह चुके हैं। इसी वजह से गांव में आज भी कई लोग उन्हें मुख्यमंत्री से पहले सरपंच के नाम से पुकारते हैं। उनके अनुसार पद बदल जाता है, पर लोगों से जुड़ाव और सेवा की भावना नहीं बदलनी चाहिए।
गांव मजबूत, तो राजस्थान मजबूत
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों से गांवों में ज्यादा समय देने को कहा। उनका मानना है कि पंचायतों में Transparency, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ने से Rural Development को रफ्तार मिलेगी। कार्यक्रम में प्रदेशभर के प्रतिनिधि सीधे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। CM ने कुछ उत्कृष्ट पंचायत प्रतिनिधियों को संदेश पत्र देकर सम्मानित भी किया।