अगस्त में 73 मौतें, सितंबर में सिर्फ 35, जानिए कैसे थमने लगा मातृ मृत्यु का आंकड़ा
राजस्थान में गर्भवती महिलाओं के इलाज को लेकर हुए सुधार अब असर दिखाने लगे हैं। मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़े राहत भरी तस्वीर पेश कर रहे हैं, लेकिन एक जिले की घटना ने चिंता भी बढ़ा दी है।
बेहतर इलाज से घटी मातृ मृत्यु दर
अनन्य सोच । मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सोमवार को स्वास्थ्य भवन में Video Conferencing के जरिए हुई समीक्षा बैठक में Maternal and Child Health Services को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार बेहतर Medical Management की वजह से अगस्त माह में हुई 73 मातृ मृत्यु के मुकाबले सितंबर में यह संख्या घटकर सिर्फ 35 रह गई है। मुख्य सचिव ने बताया कि High Risk Pregnancy की समय पर पहचान, नियमित Follow-up और Prenatal Checkup पर लगातार निगरानी रखने से यह बड़ा सुधार संभव हो पाया है।
हालांकि आंकड़ों में सुधार के बावजूद उदयपुर जिले में हुई एक मातृ मृत्यु को मुख्य सचिव ने गंभीरता से लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग के Directorate स्तर से एक विशेष टीम वहां भेजकर वहां की चिकित्सा व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की जाए। उनका कहना था कि High Risk Pregnant Women को समय पर गुणवत्तापूर्ण जांच और उपचार मिलना हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अस्पतालों में जल्द होगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती
मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में Specialist Doctors की उपलब्धता का आकलन कर जरूरत के अनुसार Recruitment Process शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या और सेवाओं के आधार पर डॉक्टरों की जरूरत की सही Mapping की जाए, ताकि Human Resources की कमी के चलते किसी मरीज को दिक्कत न हो।
मॉड्यूलर ओटी और NICU पर भी खास फोकस
बैठक में Medical Colleges में Modular OT के Upgradation पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि हर अस्पताल में होने वाले Operations के हिसाब से जरूरी संख्या में Modular OT उपलब्ध कराए जाएं, और जरूरत पड़ने पर इसके लिए केंद्र सरकार से Budget मांगा जाए। इसके साथ ही Neonatal ICU, SNCU और NICU जैसी अहम इकाइयों में जरूरी उपकरण, दवाइयां और प्रशिक्षित स्टाफ की नियमित समीक्षा के भी निर्देश दिए गए।
प्रसव सखी कार्यक्रम को मिलेगी और मजबूती
बैठक में प्रसूताओं की मदद के लिए चलाए जा रहे 'प्रसव सखी कार्यक्रम' को और बेहतर तरीके से लागू करने पर भी चर्चा हुई। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल में अस्पताल पहुंचने से लेकर प्रसव के बाद तक कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने Referral Services को भी मजबूत करने पर विशेष जोर दिया, ताकि जरूरतमंद महिलाओं और नवजातों को समय पर बेहतर अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।