राजस्थान बनेगा टेक्सटाइल का नया पावरहाउस! उद्योग जगत के साथ बड़ी बैठक में बनी रणनीति
राजस्थान के टेक्सटाइल कारोबार को अब मिलेगी नई उड़ान। सरकार और उद्योगपतियों की एक अहम बैठक में ऐसे फैसले हुए, जो राज्य को वैश्विक टेक्सटाइल हब बना सकते हैं।
अनन्य सोच। राजस्थान के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और निर्यात बढ़ाने की दिशा में शुक्रवार को उद्योग भवन में एक महत्वपूर्ण राउंड टेबल बैठक आयोजित हुई। अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य शिखर अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में टेक्सटाइल उद्यमियों, डिजाइन हाउस, डिजाइन स्टूडियो और टेक्निकल टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधियों ने तीन अलग-अलग सत्रों में हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान निर्यात बढ़ाने, उद्योग की मौजूदा चुनौतियों और उनके समाधान पर गहन मंथन हुआ। इसके साथ ही कच्चे माल के आयात पर निर्भरता घटाने और राज्य में ही उत्पादन व वैल्यू एडिशन बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की गई। शिखर अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान का कुल वस्तु निर्यात एक लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है, जिसमें टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स की हिस्सेदारी करीब 12.9 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस सेक्टर को मजबूती देने के लिए राज्य सरकार टेक्सटाइल एवं अपैरल पॉलिसी-2025 और एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2024 जैसी योजनाएं लागू कर रही है, साथ ही MSME पॉलिसी और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पॉलिसी के जरिए भी उद्यमियों को सहयोग दिया जा रहा है।
उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए एक अलग टेक्सटाइल टास्क फोर्स भी गठित की गई है, जिसका मकसद है 2030 तक भारत के 100 बिलियन डॉलर के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लक्ष्य में राजस्थान की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करना। बैठक में मौजूद उद्यमियों ने प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने, नए निवेश आकर्षित करने और वैश्विक बाजारों से बेहतर तालमेल बनाने पर भी अपने सुझाव रखे। इसके अलावा नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से मिल सकने वाले फायदों, पारंपरिक कारीगरों के कौशल विकास और डिजाइन इंस्टीट्यूट्स के साथ इंडस्ट्री के तालमेल को बढ़ाने पर भी विचार साझा किए गए।
इस बैठक में राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. एस.एन. मोडानी, डिजाइनर आशना वासवानी, फैशन डिजाइनिंग काउंसिल ऑफ राजस्थान से पुनीत खत्री और मेटेक्सिल के एमडी शालीन तोषनीवाल सहित कई प्रमुख उद्योगपतियों ने अपने विचार रखे। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि बैठक में मिले सुझावों पर गंभीरता से काम करते हुए इन्हें आगामी नीतियों में शामिल किया जाएगा, ताकि राजस्थान जल्द ही एक बड़े टेक्सटाइल हब के तौर पर अपनी पहचान बना सके।