5,578 मीटर की ऊंचाई, बर्फीले दर्रे और 250 किमी का सफर, 20 बेटियों ने रच दिया इतिहास

हौसलों की कोई सीमा नहीं होती, यह साबित कर दिखाया है देशभर से चुनी गई इन 20 बेटियों ने। ग्लेशियरों और बर्फीले पहाड़ों को पार कर इन्होंने जो कर दिखाया, वो जानकर आप भी गर्व महसूस करेंगे।

Sep 16, 2026 - 22:22
Sep 16, 2026 - 22:33
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5,578 मीटर की ऊंचाई, बर्फीले दर्रे और 250 किमी का सफर, 20 बेटियों ने रच दिया इतिहास

अनन्य सोच । नेशनल कैडेट कोर (NCC) की सबसे चुनौतीपूर्ण साहसिक गतिविधियों में शुमार 'अपराजिता - परांग ला 2026' अभियान आखिरकार सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। देशभर से चुनी गई 20 महिला कैडेटों की टीम ने हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ने वाले 5,578 मीटर ऊंचे परांग ला दर्रे को पार किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर 16 सितंबर को लद्दाख के करज़ोक में NCC के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला ने पूरी टीम का जोरदार स्वागत किया।

इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि कैडेटों ने महज 30 दिनों में करीब 250 किलोमीटर का सफर तय किया, वो भी ग्लेशियरों, बर्फ से ढके मैदानों और दुर्गम नदी घाटियों से होकर गुजरते हुए। अधिकारियों, ट्रेनरों, मेडिकल स्टाफ और सहायक कर्मचारियों की मौजूदगी में यह दल हिमाचल प्रदेश के किब्बर गांव से रवाना होकर लद्दाख के करज़ोक तक पहुंचा। गौरतलब है कि इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद 18 अगस्त को नई दिल्ली से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

अभियान की सफलता पर लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने सभी कैडेटों और स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और मुश्किलों से लड़ने की ताकत पैदा करती हैं। उन्होंने इस अभियान को युवा पीढ़ी, खासकर बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया।

दरअसल, इस ट्रेक को आयोजित करने के पीछे मकसद सिर्फ रोमांच नहीं था, बल्कि युवा महिलाओं को साहसिक खेलों की ओर प्रोत्साहित करना और उन्हें अधिक ऊंचाई वाले कठिन हालातों से रूबरू कराना भी था। साथ ही, देश के अलग-अलग कोनों से आई इन बेटियों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय एकता को भी मजबूती देना इस अभियान का एक अहम लक्ष्य रहा। यह अभियान न केवल इन 20 बेटियों बल्कि देशभर की युवा लड़कियों के लिए भी यह संदेश छोड़ गया है कि अगर हौसला बुलंद हो तो सबसे ऊंची चोटियां भी छोटी पड़ जाती हैं।