6175 कलाकृतियों में से चुनीं गईं सिर्फ 20! ललित कला अकादमी ने घोषित किए राष्ट्रीय कला पुरस्कार, जानें किसे मिला सम्मान
देशभर से हजारों कलाकारों ने अपनी बेहतरीन कृतियां भेजीं, लेकिन कड़ी छानबीन के बाद आखिरकार सिर्फ 20 कलाकृतियों को ही यह प्रतिष्ठित सम्मान मिल सका। भारत की सबसे बड़ी कला प्रदर्शनियों में शुमार इस आयोजन ने एक बार फिर देश की समकालीन कला की समृद्धि को दुनिया के सामने रखा है।
अनन्य सोच । ललित कला अकादमी (Lalit Kala Akademi) द्वारा आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी (National Exhibition of Art) को कलाकारों का जबरदस्त समर्थन मिला है। अकादमी को 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,495 कलाकारों से कुल 6,175 कलाकृतियां प्राप्त हुईं, जिनमें से सख्त चयन प्रक्रिया के बाद सिर्फ 270 कृतियों को प्रदर्शनी के लिए चुना गया।
पेंटिंग और मूर्तिकला की भरमार
चयनित कृतियों में पेंटिंग, मूर्तिकला, प्रिंटमेकिंग, ड्राइंग और मिश्रित माध्यम (Mixed Media) सहित विभिन्न कलात्मक शैलियों की झलक देखने को मिली। इसके बाद द्वितीय-स्तरीय जूरी ने अकादमी पुरस्कार के लिए 20 कलाकारों की 20 उत्कृष्ट कृतियों का चयन किया।
मूर्तिकला श्रेणी में इन्हें मिला सम्मान
मूर्तिकला श्रेणी में चंद्र शेखर सैन को टेराकोटा कृति "माई एंटायर वर्ल्ड-I", निधि चोपड़ा को सिरेमिक कृति "टैंजिबल ड्रीम्स", निमाई सिंह सरुंगबम को सागौन की लकड़ी से बनी "मुद्रा-I", पूजा राजपूत को संगमरमर की कृति "प्रकृति शोषण", रविराम रामकृष्णन को तांबे से बनी "फिशरवुमन" तथा सांता देब को सिरेमिक कृति "अट्रेक्शन ऑफ सिम्पलिसिटी" के लिए सम्मानित किया गया।
पेंटिंग श्रेणी में इन कलाकारों का जलवा
पेंटिंग श्रेणी में गोपाल चंद्र नस्कर, किशोर कुमार नरखादीवाला, मृणाल डे, प्रवीण कुमार, राजेंद्र प्रसाद, रमेश विट्ठल थोराट, संजय कुमार, संजय कुमार साहनी, संजीब कुमार गोगोई, सिद्धार्थ शाहजीराव शिंगाडे और विजेंद्र शर्मा को उनकी उत्कृष्ट कृतियों के लिए पुरस्कृत किया गया।
चित्र और प्रिंटमेकिंग में भी मिली पहचान
पैनल वर्क्स श्रेणी में पंकज कुमार शर्मा की कृति "हेलोएड ट्रैवलर-III" को सराहा गया, जबकि प्रीतम मधुकर देउसकर को नक्काशी आधारित प्रिंटमेकिंग कृति "ऑफ टाइम एंड द सिटी" के लिए सम्मान मिला। वहीं उषारंजन मंडल को मिश्रित माध्यम की कृति "व्हील ऑफ ए क्राउडेड सिटी" के लिए विशेष श्रेणी में पुरस्कृत किया गया।
कलाकारों के लिए बना अवसरों का बड़ा मंच
अकादमी का मानना है कि यह प्रदर्शनी सिर्फ पहचान का मंच नहीं, बल्कि भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था (Creative Economy) को मजबूत करने का भी जरिया है। कलाकृतियों की बिक्री से कलाकारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है, जिससे उनके काम को निरंतरता मिलती है। अकादमी ने सभी विजेताओं और निर्णायक मंडल का आभार व्यक्त किया।