अब गांव-गांव पहुंचेंगी 'पेंशन सखियां', बुढ़ापे की सुरक्षा बनेगी हर दरवाजे की गारंटी!

Sep 15, 2026 - 15:21
Sep 15, 2026 - 15:22
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अब गांव-गांव पहुंचेंगी 'पेंशन सखियां', बुढ़ापे की सुरक्षा बनेगी हर दरवाजे की गारंटी!

अनन्य सोच। करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक पेंशन और सेवानिवृत्ति सुरक्षा पहुंचाने के लिए सरकार ने महिलाओं की ताकत को हथियार बनाया है। जानिए कैसे बदलेगी गांव की तस्वीर।

ग्रामीण भारत में सामाजिक सुरक्षा को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के बीच एक अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसका मकसद है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़े महिला नेटवर्क के जरिए 'पेंशन सखियों' का एक मजबूत तंत्र खड़ा करना। इस समझौते पर ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव अमित शुक्ल और PFRDA की कार्यकारी निदेशक सुमीत कौर कपूर ने विभाग के सचिव रोहित कंसल की मौजूदगी में दस्तखत किए।

दरअसल, देश में बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ग्रामीण परिवार अपने बुढ़ापे के लिए पर्याप्त वित्तीय तैयारी भी कर पा रहे हैं। खेती, असंगठित मजदूरी और छोटे कामकाज पर निर्भर रहने वाले परिवारों की कमाई अक्सर अनिश्चित होती है, जिससे लंबी अवधि की बचत पीछे छूट जाती है। यहीं पर पेंशन सखियों की भूमिका अहम हो जाती है। ये पहले से प्रशिक्षित बैंकिंग सखियां और सामुदायिक कार्यकर्ता होंगी, जो स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, लखपति दीदियों और अन्य ग्रामीण परिवारों तक सीधे पहुंचकर उन्हें पेंशन योजनाओं की जानकारी देंगी, नामांकन में मदद करेंगी और बाद में भी उनका मार्गदर्शन जारी रखेंगी।

कार्यक्रम में सचिव रोहित कंसल ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा सिर्फ जोखिम से बचाव नहीं, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने का जरिया भी है। उन्होंने पारदर्शिता और भरोसे को इस मुहिम की नींव बताया। वहीं ममता शंकर ने बढ़ती उम्र और बदलती जनसांख्यिकी के मद्देनजर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) जैसी योजनाओं की जरूरत पर जोर दिया। इस पहल की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड और विभाग की लोकोस प्रणाली जैसे मोबाइल-वेब समाधान भी इस्तेमाल होंगे, ताकि कवरेज में कमियों को समय रहते पकड़ा जा सके। कुल मिलाकर, यह साझेदारी ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन को महज बैंक खातों से आगे ले जाकर असली सेवानिवृत्ति सुरक्षा में बदलने की तैयारी है।