कचरे से कमाल! अब सरकारी दफ्तरों में बिकेंगे फटे-पुराने कपड़ों से बने ये खास प्रोडक्ट्स, जानिए पूरा प्लान
पुराने कपड़े, कतरन और टेक्सटाइल वेस्ट अब कूड़ेदान में नहीं, बल्कि सीधे सरकारी खरीद बाजार तक पहुंचेंगे। GeM और Textile Committee के बीच हुए एक बड़े करार ने देशभर के रीसाइक्लर्स और अपसाइक्लर्स के लिए नए रोजगार और कारोबार के दरवाजे खोल दिए हैं। आखिर इस डील में ऐसा क्या खास है कि इसे टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गेम-चेंजर बताया जा रहा है, आइए जानते हैं विस्तार से।
अनन्य सोच । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले Government e-Marketplace (GeM) और कपड़ा मंत्रालय की Textile Committee ने मिलकर एक ऐसी योजना तैयार की है, जो प्री-कंज्यूमर और पोस्ट-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट से बने रीसाइक्ल्ड और अपसाइक्ल्ड प्रोडक्ट्स को सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ेगी। मुंबई में Textile Committee के 62वें स्थापना दिवस पर इस साझेदारी से जुड़े MoU पर औपचारिक मुहर लगी।
इस समझौते के तहत एक "वेस्ट-टू-वैल्यू-टू-मार्केट" मॉडल तैयार होगा, जहां कपड़ा उद्योग से निकलने वाला कचरा गुणवत्तापूर्ण उत्पादों में बदलकर सीधे सरकारी विभागों तक पहुंचेगा। Textile Committee निर्माताओं की पहचान, सत्यापन और सर्टिफिकेशन का जिम्मा संभालेगी, वहीं GeM इन प्रोडक्ट्स के लिए अलग कैटेगरी बनाकर सेलर ऑनबोर्डिंग और मार्केट लिंकेज को आसान बनाएगा। हब-एंड-स्पोक मॉडल के जरिए जमीनी स्तर के अपसाइक्लर्स और रीसाइक्लर्स तक ट्रेनिंग और सपोर्ट पहुंचाया जाएगा।
इस पहल में महिलाओं, MSME, स्थानीय कारीगरों और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े उद्यमों को खास तवज्जो दी जाएगी, जो 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन से पूरी तरह मेल खाता है।
कार्यक्रम में केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और महाराष्ट्र के कपड़ा मंत्री संजय सावकारे मौजूद रहे। GeM के अपर सीईओ अजीत बी. चव्हाण और Textile Committee सचिव कार्तिकेय धंडा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। GeM के सीईओ मिहिर कुमार ने कहा कि सर्टिफिकेशन, स्टैंडर्डाइजेशन और मार्केट एक्सेस को जोड़कर टेक्सटाइल वेस्ट से बने उत्पादों की भरोसेमंद मांग तैयार की जाएगी, जिससे सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में इनकी पहुंच तेजी से बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि टिकाऊ आजीविका और जिम्मेदार उत्पादन को भी नई दिशा देगी।