सुरों की बारिश में भीगा जयपुर, जसविंदर सिंह की गायकी ने बांधा पूरा सभागार
अनन्य सोच । रविवार की शाम जयपुर के लिए किसी सौगात से कम नहीं रही। साज़ों की धुन, अल्फ़ाज़ों की गहराई और जसविंदर सिंह की सुरीली आवाज़ ने मिलकर एक ऐसी महफ़िल रच दी, जिसे सुनने वाले देर तक नहीं भूल पाएंगे।
ग़ज़ल गायक जसविंदर सिंह को विश्वमोहन भट्ट के हाथों मदन मोहन अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया।
महाराणा प्रताप सभागार में सजी सुरों की महफ़िल
जयपुर की सांस्कृतिक संस्था द कला मंच के आयोजक राजेश शर्मा और सतेंद्र सिंह की पहल पर रविवार शाम 'ग़ज़लनामा: ग़ज़ल एवं गीत की संगीत संध्या' का आयोजन महाराणा प्रताप सभागार, विद्याश्रम में हुआ। शाम सवा छह बजे शुरू हुई यह Musical Evening रात सवा आठ बजे तक चली, और इस पूरे दो घंटे के सफर में श्रोता सुरों से बंधे रहे। सभागार में मौजूद हर व्यक्ति इस बात का गवाह बना कि जयपुर आज भी असली ग़ज़ल की कद्र करना जानता है।
जसविंदर सिंह को मिला संगीत जगत का बड़ा सम्मान
इस महफ़िल का सबसे भावुक और यादगार पल वह रहा, जब मुंबई के मशहूर ग़ज़ल गायक एवं प्लेबैक सिंगर जसविंदर सिंह को 'महान संगीतकार एवं ग़ज़ल सम्राट मदन मोहन अवार्ड-2026' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पद्मभूषण, पद्मश्री और Grammy Award Winner विश्वमोहन भट्ट के हाथों प्रदान किया गया। जैसे ही यह पल आया, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस खास मौके पर आयोजक राजेश शर्मा और सतेंद्र सिंह भी मंच पर मौजूद रहे, जिन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।
पुरानी यादों को ताज़ा कर गईं ये ग़ज़लें
महफ़िल की शुरुआत एक मशहूर ग़ज़ल से हुई, जिसके बाद जसविंदर सिंह ने एक के बाद एक कई Popular Ghazals पेश कीं, जिन्हें सुनकर श्रोता खुद को रोक नहीं पाए और दिल खोलकर दाद देते रहे। इसी दौरान दिग्गज संगीतकारों की बनाई कुछ खास Compositions को भी मंच पर गाया गया, जिसने सभागार में बैठे संगीत प्रेमियों को पुराने सुनहरे दौर की याद दिला दी। हर धुन के साथ माहौल और भावुक होता चला गया, और श्रोता जैसे किसी और ही दुनिया में खो गए।
तीन दिग्गजों को सुरों के जरिए दी गई श्रद्धांजलि
इस महफ़िल का एक बेहद खास हिस्सा वह रहा, जब मंच से ग़ज़ल की दुनिया के तीन बड़े नामों को याद किया गया। इन दिग्गज गायकों की मशहूर रचनाओं को जब स्वर मिले, तो सभागार में मौजूद हर व्यक्ति वाह-वाह करते नहीं थका। इस Musical Tribute ने साबित कर दिया कि ग़ज़ल की विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी दशकों पहले थी, और नई पीढ़ी भी इस कला की गहराई को उतनी ही शिद्दत से महसूस करती है।
संगतकारों की जुगलबंदी ने बांधा समां
जसविंदर सिंह की आवाज़ को और भी खूबसूरत बनाने का काम किया उनके साथ मंच साझा करने वाले Accompanying Artists ने। इन कलाकारों की संगत ने साज़ों और आवाज़ के बीच ऐसा तालमेल बिठाया, जिसने पूरी महफ़िल को और भी जीवंत बना दिया। यह साबित हुआ कि एक बेहतरीन गायकी के पीछे संगतकारों की मेहनत भी उतनी ही अहम होती है, जितनी मुख्य गायक की प्रतिभा।
अभिव्यक्ति का आंगन बनी द कला मंच
नाटक, नृत्य, साहित्य, कविता और संगीत को एक साथ जोड़ने वाली द कला मंच खुद को 'अभिव्यक्ति का आंगन' कहती है। संस्था के संस्थापक राजेश शर्मा और सतेंद्र सिंह के संयोजन में 'ग़ज़लनामा' के जरिए एक बार फिर जयपुर को एक सुरीली सौगात मिली। इस पूरे आयोजन में संस्था के सभी 25 सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने इस महफ़िल को सफल बनाने में अपना पूरा योगदान दिया।