Lokrang 2026: जवाहर कला केन्द्र में Talwar Raas ने रोकी सांसें, एक मंच पर दिखा पूरा भारत

जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में Lokrang के 29वें संस्करण के चौथे दिन गुजरात की तलवार रास, राजस्थानी लोक कला और देशभर की folk performances ने दर्शकों का दिल जीता।

Oct 30, 2026 - 19:43
Oct 30, 2026 - 20:46
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Lokrang 2026: जवाहर कला केन्द्र में Talwar Raas ने रोकी सांसें, एक मंच पर दिखा पूरा भारत

अनन्य सोच । जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में शुक्रवार की शाम कला, संस्कृति और संगीत का अनोखा संगम दिखा। 11 दिवसीय राष्ट्रीय लोक कला महोत्सव 'लोकरंग' के 29वें संस्करण के चौथे दिन शिल्पग्राम से मध्यवर्ती तक कई राज्यों के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं और दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे।

Talwar Raas रही आकर्षण का केंद्र

शाम की सबसे खास प्रस्तुति गुजरात के सौराष्ट्र की तलवार रास रही। कृष्ण रास की नज़ाकत से जन्मी यह परंपरा क्षत्रिय समुदाय तक पहुंची तो इसमें तलवारों का जोश और युद्धकला की शान भी जुड़ गई। लयबद्ध कदमों के बीच कलाकारों ने जब तलवारें घुमाईं, तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। रास की कोमलता और शस्त्र संचालन की धार का यह मेल मंच की जान बन गया।

शिल्पग्राम में Rajasthani Folk Art का रंग

शिल्पग्राम के मंच पर राजस्थान की लोक कलाओं ने खूब समां बांधा। जयपुर के सुधाकर दवे ने चरी नृत्य, पूरण ने कालबेलिया और तेजपाल ने कच्छी घोड़ी नृत्य पेश किया। दौसा के अरमान खां ने बहुरूपिया कला दिखाई, जबकि झुंझुनूं की सुनिता का लोक गायन, फागी के बाबू लाल का मांड गायन और बूंदी के हरिशंकर का बैल नृत्य भी सराहा गया। मिठुन की कठपुतली प्रस्तुति ने बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सभी को बांधे रखा।

कश्मीर से तमिलनाडु तक India's Cultural Diversity

इसी मंच पर गोवा की समई, मणिपुर का नागा नृत्य, तमिलनाडु का थपट्टम, पंजाब की सम्मी, झारखण्ड का पुरुलिया छऊ और जम्मू-कश्मीर का पंजेब देखने को मिला। अलग-अलग बोली और पहनावे के बावजूद कला ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरो दिया।

मध्यवर्ती में Folk Music की महफ़िल

मध्यवर्ती मंच पर हिमाचल का ओरम फो, मध्यप्रदेश की बधाई, हरियाणा का घूमर, गोवा का कुणबी नृत्य, तमिलनाडु का झिकट्टम और कड़घम कावड़ी, महाराष्ट्र की लावणी और राजस्थान के बालकों की गैर प्रस्तुतियां हुईं। ढोल-नगाड़ों की थाप ने शाम को यादगार बना दिया। आयोजन भारत की विविधता में एकता का उदाहरण रहा और आने वाले दिनों में लोक कला के और रंग देखने को मिलेंगे।