अंग्रेजों ने थोपी गुलाम मानसिकता वाली शिक्षा! राज्यपाल बागड़े का बड़ा बयान, बोले- अब बदलना होगा सिस्टम

आजादी के दशकों बाद भी क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था में अंग्रेजों की छाप बाकी है? जयपुर में आयोजित एक बड़े समिट में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने इसी सवाल को छेड़ते हुए भारतीय शिक्षा पद्धति के इतिहास से लेकर भविष्य की दिशा तक पर खुलकर अपनी बात रखी।

Sep 23, 2026 - 19:32
Sep 23, 2026 - 19:34
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अंग्रेजों ने थोपी गुलाम मानसिकता वाली शिक्षा! राज्यपाल बागड़े का बड़ा बयान, बोले- अब बदलना होगा सिस्टम

अनन्य सोच । राजधानी जयपुर के एक निजी होटल में बुधवार को आयोजित "एजुस्किल्स समिट 2026" (EduSkills Summit 2026) में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में साफ कहा कि शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) के जरिए ही विकसित भारत का सपना तेजी से साकार हो सकता है। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो सिर्फ बच्चों की बौद्धिक क्षमता को ही न बढ़ाए, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार भी बनाए।

अपने भाषण में स्वामी विवेकानंद के विचारों का हवाला देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा से बच्चे का आत्मिक, शारीरिक और चारित्रिक विकास होना चाहिए, और यह सिलसिला प्राथमिक स्तर से ही शुरू हो जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने एक दिलचस्प ऐतिहासिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि अंग्रेजों के भारत आने से पहले देश में करीब आठ लाख गुरुकुल मौजूद थे और भारतीय शिक्षा पद्धति उस दौर में बेहद उन्नत मानी जाती थी। उन्होंने लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इसी व्यवस्था ने देश में गुलाम मानसिकता को जन्म दिया।

राज्यपाल ने विनोबा भावे के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह आजादी मिलते ही देश का झंडा बदल दिया गया था, उसी तरह शिक्षा पद्धति को भी तुरंत बदला जाना चाहिए था, क्योंकि अंग्रेजी शिक्षा में पश्चिम को श्रेष्ठ दिखाने वाला इतिहास पढ़ाया जाता रहा।

नई शिक्षा नीति (National Education Policy) की सराहना करते हुए राज्यपाल ने इसे शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव बताया, जो नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का काम करेगी। उन्होंने युवाओं से नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने शिक्षा और उद्योग समन्वय में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया और शिक्षा से जुड़ी कुछ नई पुस्तकों का भी लोकार्पण किया।