50 मीट्रिक टन से 87.5 मीट्रिक टन तक का सफर, कैसे बदली सीसीएल की पूरी तस्वीर

Sep 22, 2026 - 16:02
Sep 22, 2026 - 20:00
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50 मीट्रिक टन से 87.5 मीट्रिक टन तक का सफर, कैसे बदली सीसीएल की पूरी तस्वीर

अनन्य सोच । झारखंड की कोयला कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड ने बीते एक दशक में सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि अपनी पूरी कार्यशैली बदल डाली है। Technology से लेकर Renewable Energy और Social Welfare तक, हर मोर्चे पर दिखा बड़ा बदलाव।

उत्पादन में आया रिकॉर्ड उछाल

कोल इंडिया की सहायक कंपनी Central Coalfields Limited (CCL) ने वित्त वर्ष 2013-14 के 50 Million Tonnes उत्पादन के मुकाबले 2024-25 में 87.5 Million Tonnes का उत्पादन दर्ज किया, जो कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह लगभग 75 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। इस दौरान अमरापली, मगध, चंद्रगुप्त और कोट्रे बसंतपुर पचमो जैसी Mega Mining Projects विकसित की गईं, जबकि कई और परियोजनाएं आने वाले वर्षों में उत्पादन को और बढ़ाने की तैयारी में हैं।

रेल नेटवर्क और आधुनिक निकासी व्यवस्था बनी मजबूत कड़ी

उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कोयले की Transportation Infrastructure को भी मजबूत किया गया। तोरी-शिवपुर Railway Corridor की क्षमता को लगातार बढ़ाया जा रहा है, जो हर साल करीब 100 Million Tonnes कोयला ढोने में सक्षम है। इसके साथ ही कई Coal Handling Plants और First Mile Connectivity Projects पर तेजी से काम चल रहा है, ताकि Road Transport पर निर्भरता कम हो सके।

CCL ने अपने कमांड क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करने के लिए AI-Enabled Integrated Command and Control Centre स्थापित किया है। इसके अलावा कंपनी के पास अब 32 मेगावाट से ज्यादा की Solar Power Capacity है, जबकि गिरिडीह जिले में 100 मेगावाट की Mega Solar Project पर काम जारी है। Surface Miners और Continuous Miners जैसी Blast-Free Technologies की हिस्सेदारी भी शून्य से बढ़कर करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

AI और सोलर एनर्जी से बदली कार्यशैली

मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी और सामाजिक पहल

कंपनी का Profit After Tax वित्त वर्ष 2017-18 के 808 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 4,035 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। सामाजिक क्षेत्र में भी CCL ने बड़ा योगदान दिया है, जिसमें वंचित छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा देने वाला 'CCL के लाल एवं CCL की लाडली' कार्यक्रम और रांची स्थित Khelgaon Sports Academy प्रमुख उदाहरण हैं, जिसे दो बार National CSR Award भी मिल चुका है।