मूषकराज पर सवार होकर आज पधारेंगे बप्पा, जानें स्थापना का शुभ मुहूर्त और खास संयोग
अनन्य सोच । इस बार Ganesh Chaturthi एक साथ कई मांगलिक योगों के बीच मनाई जा रही है। सोमवार का दिन, Hartalika Teej और स्वाति नक्षत्र का दुर्लभ संयोग इस पर्व को और भी खास बना रहा है। छोटीकाशी के हर घर और बाजार में बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में विशेष सजावट के साथ पूजा-अनुष्ठान की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
कब शुरू होगा दस दिवसीय उत्सव
पंचांग के हिसाब से चतुर्थी तिथि आज सुबह करीब सात बजे से शुरू होकर अगले दिन इसी समय तक रहेगी। उदयातिथि की गणना के आधार पर आज ही के दिन गणपति स्थापना की जाएगी। इसी के साथ दस दिन तक चलने वाला Ganesh Utsav शुरू होगा, जिसका समापन 25 सितंबर को Anant Chaturdashi के अवसर पर गणपति विसर्जन के साथ होगा। इस दौरान शहर में शोभायात्रा, महाआरती और रातभर जागरण जैसे आयोजनों की भी भरमार रहेगी।
स्थापना के लिए यह रहेगा सबसे उत्तम समय
ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के मुताबिक गणपति स्थापना के लिए दिन का मध्याह्न काल विशेष रूप से शुभ है। इसके अनुसार सुबह सवा ग्यारह बजे से लेकर दोपहर करीब डेढ़ बजे तक का समय स्थापना और पूजन के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इसी अवधि में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा, आरती और भोग अर्पित करेंगे।
एक ही दिन दो पर्वों का अनोखा मेल
खास बात यह है कि इस बार गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज एक ही दिन पड़ रहे हैं। तृतीया तिथि सुबह तक रहने के बाद चतुर्थी का आरंभ होगा। जहां एक ओर महिलाएं शिव-पार्वती की आराधना में जुटेंगी, वहीं दूसरी ओर घर-घर में गणपति बप्पा को विराजमान किया जाएगा। दोपहर तक बने रहने वाला ब्रह्म योग, साथ ही रवि योग और स्वाति नक्षत्र भी इस दिन को धार्मिक दृष्टि से और सशक्त बनाते हैं।
मोती डूंगरी से लेकर गढ़ गणेश तक, हर मंदिर में विशेष तैयारी
शहर के मोती डूंगरी, गढ़ गणेश, नहर के गणेशजी, ध्वजाधीश और लाल डूंगरी जैसे प्रमुख मंदिरों में गणपति को विशेष पोशाक और भोग अर्पित किया जाएगा। मोती डूंगरी मंदिर में जन्मोत्सव को लेकर भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। पौराणिक कथा के मुताबिक माता पार्वती ने उबटन से बालक की रचना कर उसे अपना द्वारपाल नियुक्त किया था, यही वजह है कि आज भी घरों के मुख्य द्वार पर गणपति की स्थापना की परंपरा निभाई जाती है।