अब राजस्थान में ही बनेंगे फिल्ममेकर्स! FTIR और सनराइजिंग सिनेविज़न एकेडमी के बीच हुआ बड़ा करार

राजस्थान के उन युवाओं के लिए खुशखबरी, जो कैमरे के पीछे या सामने अपना करियर बनाना चाहते हैं। अब उन्हें दिल्ली-मुंबई जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

Sep 16, 2026 - 22:26
Sep 16, 2026 - 22:30
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अब राजस्थान में ही बनेंगे फिल्ममेकर्स! FTIR और सनराइजिंग सिनेविज़न एकेडमी के बीच हुआ बड़ा करार

अनन्य सोच । राजस्थान में फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़ी नई प्रतिभाओं को अब घर बैठे बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिल सकेंगे। इसी कड़ी में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ राजस्थान (FTIR) और सनराइजिंग सिनेविज़न एकेडमी के बीच तकनीकी और बुनियादी ढांचे के सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस करार पर सनराइजिंग सिनेविज़न एकेडमी के निदेशक अनमोल अग्रवाल और FTIR के निदेशक सोमेंद्र हर्ष ने दस्तखत किए।

इस साझेदारी के पीछे मकसद साफ है—राजस्थान के उन युवाओं को गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग, एक्सपर्ट गाइडेंस और व्यावहारिक अनुभव देना, जो फिल्म व टेलीविजन की दुनिया में अपना करियर संवारना चाहते हैं। इसके तहत FTIR अब छायांकन, एडिटिंग, एक्टिंग, डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले राइटिंग, फिल्म प्रोडक्शन और इन्फ्लुएंसर्स के लिए कंटेंट क्रिएशन जैसे विषयों पर अपने शुरुआती कोर्स लॉन्च करने जा रहा है। इतना ही नहीं, फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग जैसे इंडस्ट्री के अहम पहलुओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

खास बात यह है कि संस्थान हर तरह के स्टूडेंट्स की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग अवधि के कोर्स ऑफर करेगा। इनमें चार दिन की वर्कशॉप से लेकर छह और बारह हफ्तों के वीकेंड कोर्स, एक महीने का क्रैश कोर्स, तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स और छह महीने का एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स तक शामिल हैं। यानी जिसे जितना समय मिले, वह उसी हिसाब से सीख सकेगा।

FTIR निदेशक सोमेंद्र हर्ष का कहना है कि राजस्थान में प्रतिभा और कहानियों की कमी कभी नहीं रही, बल्कि राज्य की समृद्ध संस्कृति, लोक कला और विरासत खुद में फिल्मों के लिए एक खजाना है। उनका मानना है कि जरूरत सिर्फ सही मंच और सही ट्रेनिंग की थी, जो अब इस साझेदारी से मिल सकेगी। वहीं सनराइजिंग सिनेविज़न एकेडमी के निदेशक अनमोल अग्रवाल ने कहा कि फिल्म बनाना केवल तकनीकी काम नहीं, बल्कि कल्पनाशीलता, अनुशासन और असरदार कहानी कहने की कला भी है, और यह करार स्टूडेंट्स को इन सभी पहलुओं पर हाथ आजमाने का मौका देगा।

इस पहल के साथ राजस्थान में फिल्म शिक्षा के एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है, जहां अब स्थानीय प्रतिभाएं अपनी कहानियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा सकेंगी।