"विजय सलगांवकर की कहानी यहीं खत्म" — डायरेक्टर अभिषेक पाठक ने बताया क्यों नहीं बनेगा 'दृश्यम 4'

Sep 14, 2026 - 22:31
Sep 14, 2026 - 22:45
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"विजय सलगांवकर की कहानी यहीं खत्म" — डायरेक्टर अभिषेक पाठक ने बताया क्यों नहीं बनेगा 'दृश्यम 4'

अनन्य सोच । सस्पेंस थ्रिलर फ्रेंचाइजी 'दृश्यम' को लेकर फैंस के मन में एक बड़ा सवाल हमेशा रहा है कि आखिर विजय सलगांवकर की कहानी कब तक चलेगी। 'दृश्यम 3' के Trailer Launch के मौके पर डायरेक्टर अभिषेक पाठक ने इस सवाल का जवाब बड़ी साफगोई से दिया। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

सवाल: क्या 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी का चौथा भाग भी आएगा?

अभिषेक पाठक: नहीं, यह इस सीरीज का आखिरी पार्ट है। हमारी जो सोच इस कहानी को लेकर थी, वह पूरी हो चुकी है। कहानी को जहां तक जाना था, वह वहां तक पहुंच गई है। अब आगे कुछ बचा नहीं है, इसीलिए हमने इसे 'The Conclusion' नाम दिया है।

सवाल: फिल्म को 'द कंक्लूजन' नाम देने के पीछे क्या सोच रही?

अभिषेक पाठक: यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि हम कहानी को एक मुकम्मल अंत देना चाहते थे। किसी भी सफल फ्रेंचाइजी को सिर्फ लोकप्रियता के आधार पर आगे बढ़ाना जरूरी नहीं होता। हर कहानी की अपनी एक सीमा होती है, और जब वह अपने स्वाभाविक निष्कर्ष तक पहुंच जाए, तो उसे वहीं समाप्त करना बेहतर होता है।

सवाल: मलयालम ओरिजिनल से इस बार की कहानी कितनी अलग है?

अभिषेक पाठक: हिंदी फ्रेंचाइजी का दूसरा और तीसरा भाग कहानी और ट्रीटमेंट के लिहाज से मलयालम वर्जन से बिल्कुल अलग है। जिन दर्शकों ने मोहनलाल की मलयालम 'दृश्यम' देखी है, उनके लिए भी यह Hindi Version एक नया अनुभव होगा। हमने खासतौर पर दूसरे और तीसरे पार्ट में अपनी अलग दिशा बनाई है, इसलिए किसी को यह नहीं लगेगा कि वे वही कहानी दोबारा देख रहे हैं।

सवाल: इस बार कलाकारों की भूमिकाओं में क्या खास रहेगा?

अभिषेक पाठक: 'दृश्यम 2' में अक्षय खन्ना ने अपने दमदार अभिनय से फिल्म में अलग प्रभाव पैदा किया था। इस बार तीसरे भाग में दर्शकों को जयदीप अहलावत और प्रकाश राज जैसे बेहतरीन Actors की महत्वपूर्ण भूमिकाएं देखने को मिलेंगी। दोनों की अपनी अलग अभिनय शैली है, जो कहानी को एक नया आयाम देती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके किरदार कहानी को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

सवाल: 'दृश्यम' सीरीज इतनी लोकप्रिय क्यों रही है?

अभिषेक पाठक: इस Franchise की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें थ्रिलर और सस्पेंस के साथ-साथ पारिवारिक भावनाओं को भी बराबर जगह दी गई है। विजय सलगांवकर और उनके परिवार की कहानी ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से इतना जोड़ा है कि वे सिर्फ आगे क्या होगा यह जानने के लिए उत्सुक नहीं रहते, बल्कि किरदारों के साथ पूरी तरह जुड़ जाते हैं। तीसरे भाग में इस रिश्ते को अंतिम निष्कर्ष तक ले जाना हमारे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी थी।

सवाल: आपका जयपुर से क्या खास जुड़ाव है?

अभिषेक पाठक: जयपुर मेरे पसंदीदा शहरों में से एक है और मैं कई बार वहां जा चुका हूं। शहर के ऐतिहासिक वैभव के साथ-साथ वहां के खान-पान ने भी मुझे हमेशा आकर्षित किया है। मुझे वहां का खाना बहुत पसंद है। इसके अलावा आमेर और जयगढ़ जैसे किले और महल भी मुझे बेहद पसंद हैं। मेरे लिए जयपुर सिर्फ एक Tourist Destination नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और स्थापत्य का ऐसा शहर है, जहां बार-बार जाने का मन करता है।

'दृश्यम: द कंक्लूजन' 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है, और अभिषेक पाठक के इस साफ बयान के बाद अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि विजय सलगांवकर की कहानी को आखिर किस अंदाज में अंतिम विराम दिया गया है।