गायों पर मंडराया लंपी का खतरा, सरकार ने बुलाई सभी विभागों की इमरजेंसी बैठक, बनाई पूरी रणनीति
राजस्थान में गौवंश पर एक बार फिर लंपी बीमारी का साया मंडरा रहा है। लेकिन इससे पहले कि हालात बिगड़ें, सरकार ने सभी विभागों को एक साथ मैदान में उतार दिया है।
अनन्य सोच। प्रदेश में गौवंश में फैल रही लंपी स्किन डिजीज पर काबू पाने के लिए बुधवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में एक अहम बैठक बुलाई गई। इसका मकसद था अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर बीमारी की रोकथाम, इलाज और नियंत्रण की प्रक्रिया को और मजबूत करना। बैठक में लंपी की मौजूदा स्थिति, प्रभावित इलाकों में चल रहे उपायों, टीकाकरण और निगरानी को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई।
पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने बताया कि फील्ड स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और पशुओं का इलाज व टीकाकरण जारी है। उन्होंने बताया कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पशुओं की आवाजाही पर चेक पोस्ट के जरिए नजर रखी जा रही है, स्थानीय पशु मेलों में जानवरों के आने पर रोक लगाई गई है और मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि फिलहाल गौवंश की मृत्यु दर बेहद कम है और रिकवरी रेट संतोषजनक बना हुआ है, लेकिन इसे दूसरे जिलों में फैलने से रोकना अब सबसे बड़ी चुनौती है।
बैठक में हर विभाग की जिम्मेदारी भी साफ तौर पर तय कर दी गई। पंचायतीराज विभाग और स्थानीय निकाय बेसहारा गौवंश के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाने, चारा-पानी और सफाई की व्यवस्था तथा फॉगिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं गृह विभाग पशुओं की अंतर्राज्यीय और अंतर-जिला आवाजाही पर नियंत्रण, चेक पोस्ट की स्थापना और पशु मेलों पर लगी रोक को सख्ती से लागू करवाने का काम देखेगा। गोपालन विभाग और आरसीडीएफ गौशालाओं में जैव सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का जिम्मा उठाएंगे। इसके अलावा वन विभाग को जंगली इलाकों के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में टीकाकरण, फॉगिंग और मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बैठक में गृह विभाग के संयुक्त सचिव सहित वन, पंचायतीराज, आरसीडीएफ, गोपालन और पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर लंपी रोग पर काबू पाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का संकल्प लिया।