IIM कलकत्ता में छात्रों को मिला बड़ा सबक! जानिए कैसे 'भाषिणी' के सीईओ ने सिखाया AI युग में सोचने का नया तरीका

Sep 13, 2026 - 22:46
Sep 13, 2026 - 22:55
 0
IIM कलकत्ता में छात्रों को मिला बड़ा सबक! जानिए कैसे 'भाषिणी' के सीईओ ने सिखाया AI युग में सोचने का नया तरीका

अनन्य सोच । भारतीय प्रबंधन संस्थान कलकत्ता के छात्रों के लिए यह दिन खास सीख लेकर आया। संस्थान की वार्षिक व्यापार संगोष्ठी 'Lattice 2026' में इस बार 'द कैपेबिलिटी डिकेड' थीम के तहत ऐसी चर्चा हुई, जिसने छात्रों को आने वाले AI युग के लिए तैयार होने का एक बिल्कुल नया नजरिया दिया। आखिर मुख्य अतिथि ने छात्रों को क्या खास सलाह दी, जानिए पूरी बात।

Capacity Building पर रहा पूरा फोकस

इस संगोष्ठी में Digital India Bhashini Division के CEO अमिताभ नाग मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। कार्यक्रम में सिर्फ टेक्नोलॉजी की बात नहीं हुई, बल्कि इस पर गहन चर्चा हुई कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में छात्रों और पेशेवरों को किन Skills और Capabilities की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि केवल तकनीकी विकास ही काफी नहीं है, बल्कि इसे सार्थक रूप से अपनाने के लिए संगठनात्मक और Ecosystem Level की समझ विकसित करना भी उतना ही जरूरी है।

छात्रों को सिखाया बड़ा सोचने का तरीका

छात्रों के साथ अपने संवाद को खास बनाते हुए नाग ने उन्हें सिर्फ व्यक्तिगत ऐप्स या प्रोडक्ट्स तक सीमित सोच रखने से आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को यह सोचना चाहिए कि वे कौन सा बड़ा Ecosystem Standard बना सकते हैं और कितनी तेजी से दूसरों की मदद से उसके इर्द-गिर्द Network Effect तैयार कर सकते हैं। यह सीख खासतौर पर उन छात्रों के लिए अहम रही, जो भविष्य में Tech Leadership की भूमिका निभाना चाहते हैं।

लाइव डेमो से मिला व्यावहारिक अनुभव

छात्रों के लिए यह सत्र सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के दौरान भाषिणी का Live Transcription Tool डेमो के तौर पर चलाया गया, जिसने रियल टाइम में भाषा अनुवाद करके दिखाया। इस Practical Demonstration ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि क्लासरूम की थ्योरी असल दुनिया में किस तरह काम करती है। नाग ने बताया कि 'भाषिणी' बनाने में सबसे बड़ी चुनौतियां कभी मॉडल से नहीं, बल्कि Market Design और Organizational Design जैसी व्यावहारिक समस्याओं से जुड़ी रहीं, जो प्रबंधन के छात्रों के लिए एक अहम केस स्टडी साबित हो सकती है।

असली जिंदगी की मिसाल बनी भाषिणी की सफलता

नाग ने छात्रों को भाषिणी के आंकड़ों के जरिए समझाया कि सही रणनीति और टीमवर्क से कोई भी प्रोजेक्ट कितना बड़ा रूप ले सकता है। आज यह प्लेटफॉर्म 800 से ज्यादा सरकारी वेबसाइट्स को सपोर्ट करता है और रोजाना 2.4 करोड़ से ज्यादा AI Inferences प्रोसेस करता है। छात्रों के लिए यह उदाहरण सिखाता है कि किताबी ज्ञान को असल दुनिया में लागू करने के लिए धैर्य, प्रयोग और लगातार सीखने की जरूरत होती है।