आंखों से नहीं देखता सैफ, फिर भी हर चाल पर नजर… ‘हैवान’ में अक्षय से भिड़ंत ने बढ़ाया रोमांच
सैफ अली खान और अक्षय कुमार की जोड़ी वाली फिल्म ‘हैवान’ एक ऐसी कहानी लेकर आती है, जिसमें एक तरफ ऐसा किरदार है जो देख नहीं सकता, वहीं दूसरी तरफ ऐसा विलेन है जिससे मुकाबला आसान नहीं। फिल्म शुरुआत में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ती है, लेकिन दूसरे हाफ में आने वाले ट्विस्ट कहानी को संभाल लेते हैं। Ananya Soch Media Group की ओर से फिल्म को 3.5 स्टार। सैफ का किरदार फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
अनन्य सोच । फिल्म हैवान में सैफ अली खान ने श्याम का किरदार निभाया है। श्याम की आंखों की रोशनी नहीं है, लेकिन उसकी सुनने और महसूस करने की क्षमता उसे सामान्य किरदारों से अलग बनाती है। आसपास हो रही गतिविधियों को बिना देखे समझ लेने वाला यह किरदार फिल्म में लगातार उत्सुकता बनाए रखता है।
सैफ ने बॉडी लैंग्वेज, आवाज और भावनाओं के जरिए किरदार को प्रभावशाली बनाया है। यही वजह है कि कई जगह फिल्म की कमजोरियां भी उनके प्रदर्शन के सामने कम महसूस होती हैं।
अक्षय बने खतरनाक विलेन
अक्षय कुमार फिल्म में परशुराम के निगेटिव किरदार में दिखाई देते हैं। ट्रेलर से उनके विलेन होने का अंदाजा पहले ही लग जाता है, लेकिन फिल्म में उनका अंदाज और अभिनय कहानी में तनाव पैदा करता है। सैफ और अक्षय के किरदारों के बीच टकराव फिल्म का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
शरीब हाशमी पुलिस इंस्पेक्टर के किरदार में अच्छे लगते हैं। असरानी के साथ उनके कुछ दृश्य फिल्म में हल्का-फुल्का हास्य भी जोड़ते हैं। सयामी खेर पुलिस अधिकारी की भूमिका में प्रभाव छोड़ती हैं, जबकि श्रिया पिलगांवकर भी अपने किरदार के साथ न्याय करती हैं।
पहला हाफ धीमा, दूसरा हाफ पकड़ता है रफ्तार
करीब 2 घंटे 44 मिनट की लंबाई ‘हैवान’ की सबसे बड़ी परेशानी है। पहला हाफ कहानी को स्थापित करने और किरदारों का बैकग्राउंड तैयार करने में ज्यादा समय लेता है। इस वजह से कुछ दर्शकों को शुरुआत थोड़ी खिंची हुई महसूस हो सकती है।
हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म बेहतर गति पकड़ती है। कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न आते हैं, जिससे स्क्रीन पर दिलचस्पी बढ़ती है। BGM को भी थोड़ा और प्रभावी बनाया जाता तो फिल्म का असर बेहतर हो सकता था।
रीमेक के टैग से फिल्म को खारिज करना सही नहीं
‘हैवान’ की तुलना सिर्फ इसलिए किसी दूसरी फिल्म से करना उचित नहीं कि यह रीमेक है। फिल्म में कमियां जरूर हैं, लेकिन इसे खराब या बेकार फिल्म कहना भी सही नहीं होगा। यह एक decent entertainer है, जो कुछ जगहों पर और बेहतर हो सकती थी।
अगर आप Saif Ali Khan या Akshay Kumar के fan हैं तो फिल्म आपको जरूर पसंद आ सकती है। खासतौर पर सैफ का अनोखा किरदार और अक्षय का निगेटिव अंदाज देखने लायक है।
Ananya Soch Media Group Rating: ⭐⭐⭐½ (3.5/5)
Verdict: मास्टरपीस नहीं, लेकिन खराब फिल्म भी नहीं। अच्छी स्टारकास्ट, दमदार परफॉर्मेंस और दूसरे हाफ के ट्विस्ट ‘हैवान’ को एक बार देखने लायक बनाते हैं।