कोपेनहेगन में हुई बड़ी डील की तैयारी! भारत-डेनमार्क ने मिलाया हाथ, छोटे उद्योगों को मिलेगी नई उड़ान
MSME, इनोवेशन और पेटेंट-ट्रेडमार्क के क्षेत्र में गहराई से जुड़ेंगे दोनों देश, जानें कोपेनहेगन बैठक में क्या-क्या हुआ तय
अनन्य सोच । भारत के छोटे और मझोले उद्योगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय और डेनमार्क के पेटेंट एवं ट्रेडमार्क कार्यालय (DKPTO) के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक अहम बैठक हुई है। 24 से 28 अगस्त 2026 तक डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में भारत-डेनमार्क संयुक्त कार्य समूह (JWG) की चौथी बैठक आयोजित की गई, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच MSME विकास, नवाचार और बौद्धिक संपदा यानी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) के क्षेत्र में साझेदारी को नई ऊंचाई देना था।
इस बैठक में भारत और डेनमार्क के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों के MSME और इनोवेशन इकोसिस्टम को लेकर विचार साझा किए और आपसी संस्थागत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर मंथन किया। चर्चा का दायरा काफी व्यापक रहा — इसमें टेक्नोलॉजी अपनाने, इनोवेशन, बौद्धिक संपदा अधिकार, तकनीक के कमर्शियलाइजेशन, आंत्रप्रेन्योरशिप और क्लस्टर आधारित MSME विकास जैसे अहम मुद्दे शामिल थे।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई MSME मंत्रालय में अपर सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने की। उनके साथ राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम संस्थान (NI-MSME) के निदेशक मोहम्मद सालिक परवेज़, सहायक निदेशक भाग्य जगदीश्वरन और संकाय सदस्य स्वप्ना वनमाला भी मौजूद रहीं। वहीं कोपेनहेगन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से डेनमार्क में भारत के राजदूत मनीष प्रभात और परामर्शदाता आशीष आर्य ने बैठक में हिस्सा लिया।
डेनमार्क की ओर से इस अहम बैठक में DKPTO की उप महानिदेशक मारिया स्कोउ, अंतरराष्ट्रीय सहयोग विभाग के वरिष्ठ सलाहकार मटियास डिनेट्ज़ और नई दिल्ली स्थित रॉयल डेनिश दूतावास में बौद्धिक संपदा अधिकार विभाग की परामर्शदाता लुईस बोइसन शामिल हुईं। इस बैठक को दोनों देशों के बीच छोटे उद्योगों और इनोवेशन क्षेत्र में लंबे समय के सहयोग की नींव के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका फायदा आने वाले वर्षों में भारतीय MSME सेक्टर को मिल सकता है।