अंतरिक्ष में भारत का एक और परचम! GSLV-F17 ने रचा इतिहास, जानिए क्यों है यह मिशन बेहद खास
भारत के स्पेस मिशनों की फेहरिस्त में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। इसरो के एक अहम रॉकेट ने अंतरिक्ष में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो देश के लिए पहली बार हुआ है। आखिर क्या है इस मिशन की खासियत, जिसने पूरे स्पेस सेक्टर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जानिए विस्तार से।
अनन्य सोच । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की यह 19वीं उड़ान थी, जिसे GSLV-F17 नाम दिया गया। इस रॉकेट में 4 मीटर व्यास वाला ओजिव (कंपोजिट) पेलोड फेयरिंग इस्तेमाल किया गया, जो इसे तकनीकी रूप से और भी खास बनाता है। इस मिशन को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के सेकंड लॉन्च पैड से लॉन्च किया गया।
इस लॉन्च की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि GSLV-F17 ने EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub-GTO) में स्थापित किया। EOS-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन यानी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से तस्वीरें लेने वाला भारत का अब तक का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। यह उपलब्धि इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि अब तक भारत के इमेजिंग सैटेलाइट्स आमतौर पर निचली कक्षाओं से ही धरती की निगरानी करते रहे हैं, लेकिन इस बार तकनीक ने एक नया मुकाम हासिल किया है।
EOS-05 का इस्तेमाल पृथ्वी की सतह, मौसम पैटर्न और प्राकृतिक संसाधनों की बेहतर निगरानी के लिए किया जाएगा, जिससे आपदा प्रबंधन, कृषि योजना और पर्यावरण अध्ययन जैसे क्षेत्रों को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से मिलने वाली जानकारी लगातार और वास्तविक समय के करीब होती है, जो पारंपरिक लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स की तुलना में कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।
इसरो के वैज्ञानिकों ने इस मिशन को पूरी तरह सफल करार दिया है। GSLV-F17 ने अपने तय लक्ष्य के मुताबिक EOS-05 को सही कक्षा में स्थापित कर दिया, जिससे यह मिशन "मिशन सक्सेस" के तमगे के साथ पूरा हुआ। यह उपलब्धि भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में एक और मील का पत्थर साबित होगी और आने वाले समय में देश के जियोसिंक्रोनस इमेजिंग प्रोग्राम को नई दिशा देगी।