राजस्थान के स्कूलों की बदलेगी सूरत: 12 हजार करोड़ के प्लान से टूटी-फूटी बिल्डिंगों का होगा कायाकल्प!
हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद हरकत में आया प्रशासन, मुख्य सचिव ने दिए बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े निर्देश — जानें कितने स्कूल हैं जर्जर और कैसे बदलेगी तस्वीर
अनन्य सोच । राजस्थान में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार अब स्कूलों की जर्जर इमारतों, टूटे कक्षा-कक्षों और शौचालयों की दशा सुधारने के लिए मैदान में उतर चुकी है। यह पूरी कवायद राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ के 11 अगस्त 2026 के आदेश की पालना में शुरू हुई है, जिसके तहत मंगलवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई।
बैठक में मुख्य सचिव ने साफ कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसी भी असुरक्षित या क्षतिग्रस्त भवन-कक्षा का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने हर स्कूल में पीने के साफ पानी और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था को अनिवार्य बताते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश के 65,308 सरकारी स्कूलों के तकनीकी सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है — 3,768 स्कूल भवन और 83,783 कक्षा-कक्ष जर्जर हालत में पाए गए हैं। फिलहाल इन असुरक्षित ढांचों में पढ़ाई पर रोक लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
इस बड़ी समस्या के समाधान के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 12,335.90 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की है। इसमें नए भवनों के निर्माण, पुरानी बिल्डिंगों की मरम्मत, जर्जर कक्षाओं की जगह नई कक्षाओं और खस्ताहाल शौचालयों के पुनर्निर्माण पर भारी-भरकम बजट खर्च होगा। खास बात यह है कि सिर्फ इसी वित्तीय वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर 3,000 करोड़ रुपये लगाए जाएंगे।
पारदर्शिता के लिए स्कूल भवनों की सुरक्षा जांच अब आईआईटी जोधपुर और एमएनआईटी जयपुर के विशेषज्ञ भी कर रहे हैं। संभाग स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर नियमित निगरानी की व्यवस्था भी लागू की गई है, ताकि हर सुधार कार्य की जमीनी हकीकत सामने आती रहे।