हंगामे में बह गया संसद का Monsoon Session, 19% Productivity के बावजूद पास हुए 12 Bills
NEET-UG Paper Leak, छात्रों के प्रदर्शन और Vande Mataram विवाद के बीच 25 दिन चला सत्र; 11 Bills बिना substantive debate के पास, आखिरी दिन छह पंक्तियों का National Song गूंजा
अनन्य सोच। संसद का 2026 का मानसून सत्र समाप्त हो गया, लेकिन इस बार की सबसे बड़ी सुर्खी कानून-निर्माण नहीं, बल्कि सदन में मचा हंगामा रही। 20 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र में 25 दिनों के दौरान कुल 19 बैठकें हुईं, लेकिन कामकाज के लिहाज से यह बेहद कमजोर साबित हुआ। लोकसभा की उत्पादकता महज 19 प्रतिशत रही, जबकि राज्यसभा भी 39 प्रतिशत तक ही सिमट कर रह गई। इसके बावजूद सरकार ने कुल 12 विधेयकों को दोनों सदनों से पारित कराने में सफलता हासिल की।
सत्र की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण बना रहा। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा शुरुआती दिनों में ही छा गया। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सदन में जमकर हंगामा किया। लगातार नारेबाजी और व्यवधानों के बीच आखिरकार 25 जुलाई को प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके तुरंत बाद अयोध्या राम मंदिर के दान में कथित चोरी का मुद्दा भी संसद की कार्यवाही पर हावी हो गया। बार-बार सदन स्थगित होने से हालात यह बन गए कि पूरे सत्र में प्रश्नकाल सिर्फ 9 मिनट ही चल सका।
इतने व्यवधानों के बावजूद सरकार ने विधायी कामकाज को आगे बढ़ाना जारी रखा। हालांकि चौंकाने वाली बात यह रही कि पारित हुए 12 विधेयकों में से 11 पर कोई ठोस बहस नहीं हो पाई। केवल पब्लिक एग्जामिनेशंस प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स संशोधन विधेयक 2026 पर दोनों सदनों में सार्थक चर्चा देखने को मिली। यह कानून पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित तरीकों को रोकने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे को और मजबूत बनाने के मकसद से लाया गया था।
इस सत्र में एक और अहम विधेयक पारित हुआ, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026, जिसके तहत वंदे मातरम् को अब राष्ट्रगान जैसी ही कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। इस कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालता है या व्यवधान पैदा करता है, तो उसे सजा का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या संशोधन विधेयक के जरिए मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर शीर्ष अदालत में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है।
इनके अलावा जन्म-मृत्यु पंजीकरण, MSME विकास, बैंकर्स बुक्स एविडेंस, ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम तथा खान एवं खनिज विकास से जुड़े विधेयक भी दोनों सदनों से पारित हुए। वहीं विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक को विवादों के चलते संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। खास बात यह रही कि इस पूरे सत्र में एक भी विधेयक को विभाग से जुड़ी स्थायी समिति के पास नहीं भेजा गया।
13 अगस्त को सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में एक भावुक और ऐतिहासिक पल भी देखने को मिला, जब वंदे मातरम् की सभी छह पंक्तियों का सामूहिक गायन हुआ। इसके तुरंत बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस सत्र के विधायी कामकाज को एक बड़ी उपलब्धि बताया, हालांकि उन्होंने भी सदन में कम हुई चर्चा को लेकर चिंता जाहिर की। दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वह जानबूझकर गंभीर बहस से बचती रही।
कुल मिलाकर 2026 का मानसून सत्र संसद की एक विरोधाभासी तस्वीर पेश कर गया। एक तरफ विधेयक पारित हुए, लेकिन उन पर गंभीर बहस नहीं हो सकी। कानून जरूर बने, लेकिन सदन का अधिकांश समय हंगामे और व्यवधानों की भेंट चढ़ गया। आखिरकार 12 विधेयकों की उपलब्धि के बावजूद महज 19 प्रतिशत उत्पादकता ही इस सत्र की सबसे बड़ी और चर्चित पहचान बनकर रह गई।