राजस्थान में सूखे का खतरा! गहलोत की चेतावनी- 17 जिलों पर मंडरा रहा संकट, अभी नहीं चेता तो बिगड़ सकते हैं हालात
मानसून की बेरुखी से राजस्थान के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को आगाह करते हुए तुरंत तैयारी शुरू करने की नसीहत दी है।
अनन्य सोच। प्रदेश में मानसून की सुस्त चाल ने चिंता बढ़ा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार को आगाह किया है कि राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के 17 जिलों में बारिश की भारी कमी के चलते सूखे जैसी स्थिति उभरने लगी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार को हालात के और बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय अभी से बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि आने वाले संकट से समय रहते निपटा जा सके।
शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए गहलोत ने बताया कि पाली, जालौर, बांसवाड़ा, जैसलमेर और उदयपुर जैसे जिलों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां सामान्य से 40 से 55 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। उन्होंने आगाह किया कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका सीधा असर खेती, किसानों, मजदूरों, पीने के पानी और मवेशियों की जिंदगी पर पड़ सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, बारिश की इस कमी से न सिर्फ कृषि उत्पादन गिरने का खतरा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा हो सकता है, क्योंकि इस मौसम में खेती से जुड़े काम ही उनकी आजीविका का मुख्य आधार होते हैं।
गहलोत ने सरकार से मांग की कि मनरेगा और शहरी रोजगार गारंटी योजना को और मजबूत किया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि इंदिरा रसोई और मनरेगा जैसी योजनाएं पहले भी मुश्किल दौर में गरीब व मेहनतकश वर्ग के लिए बड़ा सहारा साबित हुई थीं।
इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित इलाकों में पेयजल के वैकल्पिक इंतजाम, पर्याप्त अनाज भंडारण और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि सूखे की मार से आम लोगों और किसानों को कम से कम नुकसान झेलना पड़े।
अब देखना यह होगा कि गहलोत की इस चेतावनी पर सरकार कितनी गंभीरता दिखाती है और संकट से निपटने के लिए समय रहते कौन से कदम उठाए जाते हैं।