राजस्थान में 1.44 करोड़ वोटर तय करेंगे 855 वार्डों का भविष्य, जानें कब-कहां होगी वोटिंग

नगर निगम चुनाव 2026 का पूरा शेड्यूल तैयार, जयपुर में एक झटके में घट गए 100 वार्ड

Aug 31, 2026 - 22:56
Aug 31, 2026 - 23:01
 0
राजस्थान में 1.44 करोड़ वोटर तय करेंगे 855 वार्डों का भविष्य, जानें कब-कहां होगी वोटिंग

अनन्य सोच। राजस्थान में म्युनिसिपल इलेक्शन 2026 को लेकर तैयारियां अब फाइनल स्टेज में पहुंच चुकी हैं। राज्य के 10 नगर निगमों में इस बार कुल 855 वार्डों के लिए पार्षद चुने जाएंगे। स्टेट इलेक्शन कमीशन के मुताबिक पूरे प्रदेश में 309 अर्बन लोकल बॉडीज हैं, जिनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर कुल 10,245 वार्डों पर वोटिंग होनी है।

राजस्थान के जिन 10 नगर निगमों में चुनाव होंगे, उनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, अलवर, भीलवाड़ा और पाली शामिल हैं। सबसे बड़ा बदलाव जयपुर में देखने को मिला है, जहां डीलिमिटेशन के बाद वार्डों की संख्या घटकर 150 रह गई है, जबकि पहले दो अलग-अलग निगमों में कुल 250 वार्ड हुआ करते थे। जयपुर में वोटर्स की संख्या भी सबसे ज्यादा है, यहां करीब 24.2 लाख लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इसी तरह जोधपुर नगर निगम में वार्डों की संख्या 160 से घटकर सीधे 100 पर आ गई है। बाकी निगमों की बात करें तो अजमेर और बीकानेर में 80-80, भीलवाड़ा में 70, जबकि अलवर और भरतपुर में 65-65 वार्ड तय किए गए हैं।

नॉमिनेशन प्रोसेस की बात करें तो 31 अगस्त को यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस दौरान कुल 27,882 कैंडिडेट्स ने 34,220 नामांकन पत्र दाखिल किए। स्क्रूटनी के बाद नाम वापसी के लिए 3 सितंबर तक का समय दिया गया है, वहीं चुनाव चिन्हों का आवंटन 4 सितंबर को होगा।

वोटिंग को दो फेज में बांटा गया है। पहले फेज में 9 सितंबर को कई नगर परिषदों, पालिकाओं और कुछ निगमों में मतदान होगा, जबकि दूसरे और अहम फेज में 11 सितंबर को जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर और उदयपुर जैसे बड़े निगमों में वोटिंग कराई जाएगी। दोनों ही चरणों में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जा सकेंगे। मतगणना 14 सितंबर को होगी, जबकि मेयर व अध्यक्ष पद के चुनाव 21 सितंबर और उपाध्यक्ष का चुनाव 22 सितंबर को कराया जाएगा। पूरे प्रदेश में करीब 1.44 करोड़ वोटर्स इस बार वोटिंग करेंगे।

डीलिमिटेशन के चलते कई निगमों में वार्डों की संख्या कम हुई है, जिसका सीधा असर यह पड़ेगा कि अब हर पार्षद को पहले से बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करना होगा। रिजर्वेशन नियमों के तहत एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए तय कोटा लागू रहेगा, जिसके तहत कुल वार्डों में करीब एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।

बीजेपी और कांग्रेस दोनों प्रमुख पार्टियां बड़े नगर निगमों के लिए अपनी कैंडिडेट लिस्ट पहले ही जारी कर चुकी हैं, ऐसे में जयपुर समेत कई शहरों में इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलने वाला है। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बाद से डेवलपमेंट वर्क्स पर रोक लगा दी गई है। यह चुनाव 'एक राज्य, एक चुनाव' के तहत एक साथ कराए जा रहे हैं, जिससे लोकल गवर्नेंस को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।