भारत के समंदर में छिपा है अरबों का खजाना, अब गहराई से निकलेगा देश का भविष्य

12 हजार किलोमीटर लंबी तटरेखा और गहरे समुद्र में छिपे अनदेखे संसाधन, अब भारत ने इन्हें अर्थव्यवस्था और सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत बनाने का प्लान तैयार किया है।

Sep 11, 2026 - 21:13
Sep 11, 2026 - 21:15
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भारत के समंदर में छिपा है अरबों का खजाना, अब गहराई से निकलेगा देश का भविष्य

तटरेखा को लेकर आया बड़ा नजरिया

अनन्य सोच । केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने Coastal Ecology, Security and Sustainability यानी CSES 2026 पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए बड़ी बात कही। उनके मुताबिक, भारत की तटरेखा को अब इकोलॉजी, इकोनॉमी, टेक्नोलॉजी और ह्यूमन डेवलपमेंट के आपस में जुड़े हुए क्षेत्र के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि अलग-अलग टुकड़ों में। उन्होंने बताया कि भारत के पास करीब 11 हजार से 12 हजार किलोमीटर लंबी Coastline है, जो इसे दुनिया में सबसे लंबे समुद्री किनारों वाले देशों में शामिल करती है और यह Marine Resources व Blue Economy के लिहाज से बेहद अहम है।

डीप ओशन मिशन से मिलेगी बड़ी ताकत

अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने Deep Ocean Mission के महत्व पर भी खासतौर से जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत अब स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करते हुए गहरे समुद्र में छिपे अनजान संसाधनों की खोज की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में हाल ही में देश का पूरी तरह Indigenous Research Vessel, ORV सागर मंथन लॉन्च किया गया, जिसे गहरे समुद्र अनुसंधान में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही समुद्र की गहराइयों तक पहुंचने के लिए खास Robots और Submersibles भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे Deep Sea Exploration की क्षमता को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है।

अर्थव्यवस्था और तटीय समुदायों के लिए क्यों जरूरी

डॉ. सिंह ने कहा कि अगर देश को अपनी इकोनॉमी को नई बुलंदियों तक ले जाना है, तो उन संसाधनों की तरफ देखना ही होगा जिन्हें अब तक पूरी तरह एक्सप्लोर नहीं किया गया है। उन्होंने धातु, खनिज और Fisheries Sector को इस दिशा में बड़ी संभावना वाले क्षेत्र बताया, साथ ही पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की जरूरत भी रेखांकित की। उन्होंने तटीय इलाकों में रहने वाले समुदायों की भूमिका को भी अहम बताया और कहा कि इनकी आजीविका और पारंपरिक ज्ञान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, साथ ही पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना भी उतना ही जरूरी है।

टेक्नोलॉजी और 12 सितंबर से शुरू होगा सफाई अभियान

कार्यक्रम में डॉ. सिंह ने बताया कि Ocean Observation, Monitoring, Communication और Remote Sensing जैसी उभरती तकनीकें आने वाले समय में तटीय सुरक्षा को कई गुना मजबूत बना सकती हैं। साथ ही उन्होंने "स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर" अभियान का भी जिक्र किया, जो पिछले पांच साल से चल रहा है। इस साल यह Clean Coast Campaign 12 सितंबर से 19 सितंबर तक चलेगा, जिसमें सफाई अभियान के साथ-साथ NGOs की भागीदारी और एक खास नागरिक Pledge भी शामिल होगी।

आगे किस दिशा में बढ़ेगा भारत

इस पूरे संबोधन से साफ है कि सरकार अब तटीय क्षेत्र को सिर्फ सुरक्षा या पर्यावरण तक सीमित न रखकर, एक व्यापक Blue Economy Vision के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी में है। पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और सुरक्षा को एक साथ जोड़कर एक मजबूत और टिकाऊ Coastal Future तैयार करना ही अब इस पूरी रणनीति का सबसे बड़ा लक्ष्य बनकर उभरा है।