60 नहीं, अब 82 रुपए किलो! कर्नाटक की तुअर दाल ने मालदीव में मचाई धूम, किसानों की चमकी किस्मत
क्या एक दाल किसानों की जिंदगी बदल सकती है? कर्नाटक के एक छोटे से क्षेत्र की खास पहचान रखने वाली दाल ने अब विदेशी धरती पर कदम रख दिया है, और इसका सीधा फायदा वहां के किसानों की जेब में जा रहा है, जो पहले से 30 प्रतिशत ज्यादा कमाई कर रहे हैं।
अनन्य सोच । कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण एपीडा (APEDA) ने कर्नाटक की जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त गुलबर्गा तुअर दाल की एक मीट्रिक टन खेप 24 सितंबर को मालदीव के लिए रवाना की। इस पहल का मकसद भारत के भौगोलिक संकेतक वाले कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाना है।
किसानों को मिला बंपर फायदा
इस निर्यात की सबसे बड़ी खासियत रही किसानों को मिलने वाला बेहतर मूल्य। जहां घरेलू बाजार में दाल की कीमत 60 रुपए प्रति किलो है, वहीं निर्यात के जरिए किसानों को 82 रुपए प्रति किलो का दाम मिल रहा है, यानी सीधे 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी।
मैसूर की कंपनी ने संभाली निर्यात की जिम्मेदारी
मैसूर स्थित सिल्केन ग्लोबल एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स (Silken Global Exports and Imports) ने अपने किसान उत्पादक संगठन (FPO) आधारित ब्रांड के जरिए इस खेप का निर्यात किया, जिसे समुद्री मार्ग से मालदीव भेजा जाएगा।
2019 में मिला था जीआई टैग
कर्नाटक के कलबुर्गी क्षेत्र से जुड़ी गुलबर्गा तुअर दाल को अपने खास स्वाद और गुणवत्ता के लिए 2019 में भौगोलिक संकेतक प्रमाणन मिला था। यह क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा मानी जाती है।
एपीडा अध्यक्ष ने जताई खुशी
एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि यह निर्यात दाल की वैश्विक पहचान बनाने के साथ-साथ आगे बाजार विस्तार का रास्ता भी खोलेगा। खेप रवानगी के मौके पर वरिष्ठ सलाहकार डॉ. तरुण बजाज और महाप्रबंधक विनिता सुधांशु सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
नियमित आपूर्ति की उम्मीद
अधिकारियों को भरोसा है कि इस पहली खेप के बाद मालदीव को गुलबर्गा तुअर दाल की नियमित आपूर्ति शुरू हो सकेगी, जिससे कर्नाटक के किसानों और निर्यातकों को लगातार नए बाजार अवसर मिलते रहेंगे।