जब सेवा बनती है नवाचार! केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बेंगलुरु में शुरू की युवाओं के लिए खास चुनौती, दिसंबर में मिलेगा बड़ा इनाम
क्या सेवा भावना और तकनीकी नवाचार मिलकर देश की तस्वीर बदल सकते हैं? बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित संस्थान में केंद्रीय मंत्री ने इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए एक बड़ी पहल की शुरुआत की, जिसमें देश के युवा नवोन्मेषकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा मौका मिलेगा।
अनन्य सोच । केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु में दक्षिण क्षेत्र के लिए "सेवा प्रथम नवाचार चुनौती" (Seva First Innovation Challenge) का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट और पंजीकरण पोर्टल की भी शुरुआत की।
सेवा और नवाचार का बताया गहरा नाता
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सेवा को कर्म में व्यक्त होना चाहिए और किसी समस्या का व्यावहारिक समाधान खोजना ही असली सेवा है। उन्होंने भारत के जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Dividend) का जिक्र करते हुए कहा कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जो जिज्ञासु और तकनीक से जुड़ी हुई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का दिया हवाला
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy) की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि इसने आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान को शिक्षा के केंद्र में रखा है। उन्होंने 10 हजार से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स और स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।
पांच बड़े विषयों पर होगा फोकस
यह चुनौती स्वच्छ भारत, समृद्ध किसान, स्वस्थ भारत, शिक्षित भारत और सुरक्षित भारत जैसे पांच राष्ट्रीय विषयों पर केंद्रित रहेगी। इसमें स्कूल, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और विश्वविद्यालयों के छात्र एक साथ भाग ले सकेंगे। पंजीकरण 25 सितंबर से 24 अक्टूबर 2026 तक खुला रहेगा।
दिसंबर में दिल्ली में होगा समापन समारोह
कार्यक्रम का राष्ट्रीय समापन समारोह दिसंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जहां देशभर के सर्वश्रेष्ठ नवाचार समाधानों को मंच मिलेगा। जोशी ने स्टार्टअप्स और उद्योग जगत से युवा नवोन्मेषकों के साथ जुड़ने की अपील भी की।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर आईआईएससी बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर गोविंदन रंगराजन, उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव आनंदराव वी. पाटिल और यूजीसी की सचिव प्रोफेसर श्यामा सहित कई संस्थानों के निदेशक, संकाय सदस्य, उद्योग प्रतिनिधि और छात्र मौजूद रहे।