जुलाई में महंगाई ने दी थोड़ी राहत, लेकिन ईंधन की कीमतों ने फिर बिगाड़ा आम आदमी का बजट
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) 9.78% पर पहुंचा, जून के मुकाबले मामूली गिरावट — लेकिन फ्यूल इन्फ्लेशन अब भी 20% के पार, जानें पूरी रिपोर्ट
अनन्य सोच। देश की महंगाई को लेकर सरकार ने ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं, जो आम आदमी की जेब पर पड़ रहे असर की पूरी तस्वीर पेश करते हैं। जुलाई 2026 के लिए wholesale price index (WPI) inflation दर 9.78 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो जून 2026 के 9.87 प्रतिशत से थोड़ी कम है। हालांकि यह राहत बहुत मामूली है, क्योंकि सालाना आधार पर महंगाई अभी भी दहाई अंकों के करीब बनी हुई है।
किन चीजों ने बिगाड़ा महंगाई का गणित
आंकड़ों के अनुसार, primary articles, fuel and power तथा manufactured products तीनों प्रमुख समूहों की inflation rate जुलाई में क्रमशः 8.52%, 20.05% और 8.29% रही। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि fuel and power की महंगाई भले ही जून के 27.41% से घटकर 20.05% पर आई हो, लेकिन यह अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला factor बना हुआ है।
खाने-पीने की चीजों में भी बढ़ी महंगाई
रिपोर्ट के मुताबिक, food index में सालाना आधार पर 6.65 प्रतिशत की inflation दर्ज हुई, जो जून में 6.14 प्रतिशत थी। 'मिनरल ऑयल', 'फूड आर्टिकल्स', 'बेसिक मेटल्स मैन्युफैक्चरिंग' और 'केमिकल प्रोडक्ट्स' महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारक रहे। यानी रसोई से लेकर उद्योग तक हर स्तर पर कीमतों का दबाव बना हुआ है।
मई महीने के आंकड़ों में हुआ बड़ा संशोधन
सरकार ने मई 2026 के final estimates में भी बदलाव किया है। पहले जो WPI inflation 9.68 प्रतिशत बताई गई थी, अब उसे संशोधित कर 9.88 प्रतिशत कर दिया गया है। यह संशोधन दर्शाता है कि शुरुआती अनुमान और वास्तविक आंकड़ों में कितना बड़ा फर्क आ सकता है।
अगला डेटा कब आएगा
Ministry of Commerce and Industry के अनुसार, अगस्त 2026 महीने के WPI आंकड़े 14 सितंबर 2026 को जारी किए जाएंगे। बाजार और उद्योग जगत की निगाहें अब इस अगली रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि इससे यह साफ होगा कि क्या महंगाई की यह मामूली राहत आगे भी जारी रहेगी या फिर एक बार फिर बढ़त की तरफ बढ़ेगी।