जयपुर में ब्रिक्स देशों का बड़ा मंथन! निर्मला सीतारमन ने खोले भारत की तरक्की के राज़
दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने आखिर निजी पूंजी जुटाना इतनी बड़ी चुनौती क्यों बन गया है? जयपुर में हुए एक बड़े सेमिनार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने इसका जवाब देते हुए भारत की सफलता की पूरी कहानी बताई। आखिर क्या है वो रणनीति, जिससे भारत ने बदली अपनी तस्वीर? जानने के लिए पढ़ें अंत तक।
अनन्य सोच । जयपुर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक गवर्नरों (FMCBG) की बैठक के दौरान केंद्रीय वित्त तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने बुधवार को "न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका: सदस्य देशों में निजी पूंजी जुटाने में" विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने एक बड़ी बात कहते हुए बताया कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाएं भले ही ग्लोबल इकॉनमी के विकास की मुख्य धुरी हों, लेकिन बड़े स्तर पर प्राइवेट कैपिटल जुटाने में इन सभी देशों को एक जैसी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
भारत के अनुभव को साझा करते हुए सीतारमन ने बताया कि पिछले एक दशक में सरकार ने लगातार पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर देश के इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे को मजबूत किया है, जिससे हाईवे, रेलवे, बंदरगाह और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बड़ी राष्ट्रीय संपत्तियां तैयार हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मानना है कि सार्वजनिक पूंजी को निजी निवेश की जगह लेने वाला नहीं, बल्कि उसे बढ़ावा देने वाला माध्यम बनना चाहिए।
इसी सोच के तहत सरकार ने वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF), हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) जैसे कई अहम सुधार किए हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और नेशनल वॉटरवेज जैसी कई नई पहलें भी शामिल की गई हैं, जो प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट को और रफ्तार देंगी।
वित्त मंत्री ने अपने भाषण के समापन में कहा कि डेवलपमेंट फाइनेंस का भविष्य आपसी साझेदारी में ही निहित है। इस सेमिनार में ब्राजील की पूर्व राष्ट्रपति एवं NDB अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ ने भी विशेष संबोधन दिया, जबकि IRDAI चेयरमैन अजय सेठ और NDB वाइस-प्रेसिडेंट रोमन सेरोव सहित कई वैश्विक विशेषज्ञों ने पैनल चर्चा में हिस्सा लिया।