सड़कों पर दौड़ेगी 'आर्ट कार', 3,500 किमी के सफर में खुलेंगे राजस्थान के छुपे राज़

4 सितंबर से शुरू होगी अनोखी यात्रा, कलाकारों-शिल्पकारों की अनसुनी कहानियां आएंगी सामने

Aug 31, 2026 - 17:47
Aug 31, 2026 - 17:50
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सड़कों पर दौड़ेगी 'आर्ट कार', 3,500 किमी के सफर में खुलेंगे राजस्थान के छुपे राज़

अनन्य सोच । राजस्थान को अब सिर्फ किलों-महलों की पहचान से आगे बढ़कर देखने की तैयारी है। 'कार्टिस्ट' नाम की संस्था अपने नए प्रोजेक्ट 'स्टोरीज ऑफ इंडियन सिटीज' का पहला चैप्टर राजस्थान से शुरू करने जा रही है। 4 से 23 सितंबर तक चलने वाले इस सफर में टीम करीब 3,500 किलोमीटर का रास्ता तय करेगी और इस दौरान प्रदेश के कोने-कोने में बसी कला, संस्कृति और परंपराओं को खोजकर उन्हें दुनिया के सामने लाएगी। इस यात्रा की खासियत एक खास तौर पर तैयार की गई 'आर्ट कार' है, जो खुद में एक चलती-फिरती गैलरी है।

करीब 45 दिन की मेहनत के बाद इस कार को कलाकार श्रीकांत रंगा ने डिजाइन किया है। कार के बाहरी हिस्से में राजस्थानी कठपुतली कला, बीकानेर की मशहूर बादला शिल्पकला और उदयपुर के परंपरागत लकड़ी के खिलौनों की झलक देखने को मिलेगी। वहीं हिमांशु जांगिड़ की टीम ने कार के अंदरूनी हिस्से को बाड़मेर के पारंपरिक टेक्सटाइल से सजाया है। यानी यह कार जहां भी जाएगी, अपने आप में राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान बनकर सामने आएगी।

यात्रा जयपुर से शुरू होकर सामोद, शेखावाटी, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, ओसियां, पोखरण, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, जवाई, रणकपुर, नाथद्वारा, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, कोटा, सवाई माधोपुर, भरतपुर, डीग, कामां, अलवर और आभानेरी से गुजरते हुए वापस जयपुर पहुंचेगी। इन 20 दिनों में टीम स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, संगीतकारों, रसोइयों और पारंपरिक कारोबार से जुड़े परिवारों से रूबरू होगी।

खास बात यह है कि इस अभियान में सिर्फ मशहूर व्यंजनों की बात नहीं होगी, बल्कि उन गुमनाम रेसिपीज़ की तलाश की जाएगी जो राजस्थान के मौसम, संसाधनों और यहां की जीवनशैली से जुड़ी रही हैं। इसके अलावा पुराने घरों, हवेलियों, बाजारों और मंदिरों की स्थापत्य कला को भी दस्तावेज में शामिल किया जाएगा।

सबसे दिलचस्प पहलू है राजस्थान की पारंपरिक जल-संग्रह प्रणालियों को सामने लाना। बावड़ियों, कुंडों, टांकों और तालाबों के जरिए सदियों पहले पानी बचाने के जो तरीके अपनाए गए, उनकी कहानियां भी इस यात्रा का हिस्सा होंगी।

'कार्टिस्ट' और 'स्टोरीज ऑफ इंडियन सिटीज' के संस्थापक हिमांशु जांगिड़ का कहना है कि वर्षों तक कलाकारों-शिल्पकारों के साथ काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि इनके पास ज्ञान और विरासत का बड़ा खजाना है, लेकिन उनकी कई कहानियां आज तक दर्ज नहीं हो पाई हैं और कुछ तो धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान इस बड़े मिशन का पहला पड़ाव है, इसके बाद यह यात्रा पूरे भारत में फैलेगी और अलग-अलग शहरों की अनकही कहानियों को सहेजने का काम करेगी।