जब 50 कलाकारों की आवाज से गूंज उठा JKK, 150 साल का हुआ ‘वंदे मातरम्’ का जश्न
राग देस और किरवानी में सजा राष्ट्रगीत, ग्रैमी विजेता पंडित विश्व मोहन भट्ट ने की दीप प्रज्वलन से शुरुआत
अनन्य सोच। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जयपुर के Jawahar Kala Kendra (JKK) का रंगायन सभागार देशभक्ति के सुरों से गूंज उठा। मौका था दर्शक संस्था के प्रतिष्ठित Music Program 'हम गीत वतन के गायेंगे' का, जिसमें करीब 50 Artists ने गीत, संगीत और नृत्य के जरिए राष्ट्रप्रेम की अनूठी छटा बिखेरी। इस बार कार्यक्रम खास इसलिए भी रहा क्योंकि इसमें राष्ट्रीय गीत 'Vande Mataram' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसकी कई अलग-अलग संगीतमय और नृत्य प्रस्तुतियां पेश की गईं।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रोमिला राजीव की रचना और राजीव भट्ट के संगीतबद्ध गीत 'हम गीत वतन के गायेंगे' से हुई। इसके बाद राग देस पर आधारित 'वन्दे मातरम्' ने माहौल में शास्त्रीय रंग घोल दिया। राधिका कल्चरल सोसायटी के कलाकारों की Dance Performance ने इसे और खास बना दिया, वहीं राग किरवानी पर आधारित प्रस्तुति ने राष्ट्रगीत को एक नया संगीतमय आयाम दिया।
कार्यक्रम में 'गुनगुनाते और गाते चले', फिल्म 'वीर-जारा' का 'धरती सुनहरा अंबर नीला' और 'सुनो गौर से दुनिया वालों' जैसे गीतों ने देश की मिट्टी की खुशबू बिखेरी। समापन पर 'ऐ वतन ऐ वतन', 'मेरा रंग दे बसंती चोला' और 'मेरे देश की धरती' के मैडले ने पूरे सभागार में जोश भर दिया।
मंच पर रेखा भट्ट, सौम्या शर्मा, राजू सजनानी, विभा सिंह और अनुपमा मिश्रा सहित लगभग 50 कलाकार नजर आए। Choreography की जिम्मेदारी राधिका कल्चरल सोसायटी की नृत्य गुरु रेखा सैनी ने संभाली, जबकि की-बोर्ड, गिटार, तबला और ढोलक पर संगतकारों ने प्रस्तुतियों में जान डाल दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ Grammy Award विजेता एवं पद्मभूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस मौके पर सी.के. बिरला अस्पताल के डॉ. देवेंद्र के. शर्मा और राजस्थान के पूर्व महाधिवक्ता जी.एस. बापना भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।