खेत-खेत पहुंचेगा AI का जादू! राजस्थान में किसानों की किस्मत बदलने की तैयारी, बुवाई से लेकर बीमा तक मिलेगी स्मार्ट मदद

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब खेतों की भी तकदीर बदलने वाला है? राजस्थान के कृषि विभाग ने कुछ ऐसा ही बड़ा कदम उठाया है, जिससे आने वाले समय में किसानों को मौसम, फसल और बाजार से जुड़े फैसले लेने में मिलेगी अत्याधुनिक तकनीक की ताकत।

Sep 25, 2026 - 21:26
Sep 25, 2026 - 21:32
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खेत-खेत पहुंचेगा AI का जादू! राजस्थान में किसानों की किस्मत बदलने की तैयारी, बुवाई से लेकर बीमा तक मिलेगी स्मार्ट मदद

अनन्य सोच । प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली (Data-Based Decision System) से जोड़ने के मकसद से कृषि विभाग ने एक बड़ी पहल की है। इसी कड़ी में शुक्रवार को पंत कृषि भवन में वाधवानी इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Wadhwani AI) के विशेषज्ञों द्वारा कृषि अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

AI बनेगा किसानों की सेवा का अभिन्न हिस्सा

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना रहा। विभाग की मंशा साफ है, AI को सिर्फ तकनीकी प्रयोग तक सीमित न रखकर इसे कृषि प्रशासन और किसान सेवाओं का स्थायी हिस्सा बनाना।

कृषि आयुक्त ने बताए AI के बड़े फायदे

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि बुवाई से लेकर कटाई और उपज बिक्री तक पूरी वैल्यू चेन (Value Chain) में AI किसानों के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि मौसम आधारित सलाह, कीट-रोग पहचान, उत्पादन पूर्वानुमान और सिंचाई प्रबंधन जैसे कार्यों में यह तकनीक अहम भूमिका निभाएगी।

अब मिलेगी सटीक और समयबद्ध सलाह

डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) की मदद से किसानों को अब बुवाई, उर्वरक और कीट नियंत्रण जैसे फैसले लेने में स्थानीय और सटीक जानकारी मिल सकेगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और फसल की पैदावार बढ़ेगी।

फसल बीमा योजना में बढ़ेगी पारदर्शिता

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Fasal Bima Yojana) के तहत रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और इमेज एनालिटिक्स जैसी तकनीकों से फसल नुकसान का आकलन अब ज्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा, जिससे दावों का निपटारा भी तेज होगा।

तैयार होगा मजबूत संस्थागत ढांचा

कृषि विभाग AI आधारित नवाचारों के लिए तकनीकी संस्थानों, शोध संगठनों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय स्थापित करते हुए एक मजबूत संस्थागत ढांचा (Institutional Framework) तैयार करने में जुटा है।