राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कलाकारों को दिया बड़ा सम्मान: 'हमारे कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक हैं', जानें क्यों खास रहा यह मौका

नई दिल्ली में 2024 और 2025 के लिए Sangeet Natak Akademi Fellowship और Sangeet Natak Akademi Award से नवाजे गए देशभर के प्रतिष्ठित कलाकार, राष्ट्रपति ने गुरु-शिष्य परंपरा और लोक कलाओं के संरक्षण पर दिया खास संदेश

Aug 13, 2026 - 22:17
Aug 13, 2026 - 22:22
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कलाकारों को दिया बड़ा सम्मान: 'हमारे कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक हैं', जानें क्यों खास रहा यह मौका

अनन्य सोच । भारतीय संस्कृति और कला की दुनिया के लिए बुधवार का दिन बेहद खास रहा। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों को वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर राष्ट्रपति के संबोधन ने वहां मौजूद हर कलाकार और दर्शक के दिल को छू लिया।

अपने भाषण में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज सम्मानित हुए कलाकार मिलकर भारत का एक ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जिसमें देश की मिट्टी से जुड़ी कथाएं, गीत, विविधतापूर्ण नृत्य, उत्सव और सदियों पुरानी भाषाओं-बोलियों की यादें एक साथ समाई हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सीधे प्रकृति से जुड़ी है। यहां की वेशभूषा, खान-पान, नृत्य और संगीत सब कुछ चिड़ियों की चहचहाहट, बहते झरनों, नदियों और बादलों से प्रेरणा लेते हैं। यही विविधता और एकता का अनोखा संगम भारतीय कलाओं की सबसे बड़ी ताकत है।

राष्ट्रपति ने इस दौरान एक बेहद अहम मुद्दे की ओर भी सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि भारत की सभी कला विधाओं में गुरु-शिष्य परंपरा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, लेकिन आज के तेजी से बदलते दौर में कई लोक-कलाएं विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। ऐसे में इन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि संगीत नाटक अकादमी इसी मकसद से 'कला-दीक्षा' कार्यक्रम चला रही है और वरिष्ठ कलाकारों से अगली पीढ़ी को तैयार करने की अपील की।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि लोक और जनजातीय कलाओं में जीवन का स्वाभाविक उल्लास और प्रकृति के साथ गहरा नाता दिखता है, जो समुदाय की सामूहिक स्मृति को सहज रूप से व्यक्त करता है। उन्होंने सभी सम्मानित कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि ये कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं।

अंत में राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी को भारत की सॉफ्ट पावर का अहम केंद्र बताते हुए विश्वास जताया कि यह संस्था आगे भी भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा से पूरी दुनिया को लाभान्वित करती रहेगी।