'माँ होने से पहले... एक स्त्री होने की कहानी': जयपुर में महिलाओं ने खुलकर बांटे अपने अनकहे एहसास, हंसी-आंसुओं के बीच खोजी खुद की खोई हुई पहचान
FBS Jaipur द्वारा आयोजित इस Emotional Session में Expert Arushi Agarwal ने कराई महिलाओं की Self-Discovery Journey, 100 से ज्यादा Mothers की Heartfelt Testimonials ने बना दिया इसे यादगार शाम
अनन्य सोच। क्या आपने कभी सोचा है कि एक स्त्री, माँ बनने से पहले खुद कितने रूपों से गुजरती है? बेटी, बहन, पत्नी और फिर माँ, इन सभी भूमिकाओं के बीच कहीं न कहीं उसकी अपनी असली पहचान खो सी जाती है। इसी गहरे और भावुक विषय को केंद्र में रखते हुए जयपुर में महिलाओं के एक खास समूह के लिए एक बेहद आत्मीय Session का आयोजन किया गया, जिसने वहां मौजूद हर महिला के दिल को छू लिया।
FBS Jaipur द्वारा आयोजित इस खास Session का संचालन एक्सपर्ट अरुषि अग्रवाल ने किया। इस दौरान महिलाओं की जिंदगी के अलग-अलग Phases पर खुलकर बातचीत हुई, जिसमें बेटी, बहन, पत्नी, माँ और सबसे अहम, एक स्वतंत्र स्त्री के रूप में उनकी पहचान शामिल थी। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि यह सत्र सिर्फ Motherhood तक सीमित नहीं रहा।
दरअसल यह पूरा सफर था खुद को फिर से पहचानने का, अपनी भावनाओं को समझने का और उन अनकहे एहसासों को शब्द देने का, जो अक्सर महिलाएं अपने भीतर ही दबाए रखती हैं। सत्र के दौरान कई ऐसे भावुक पल आए, जब हंसी के बीच अचानक कई महिलाओं की आंखें नम हो गईं। हर किसी ने अपनी जिंदगी के किसी न किसी हिस्से को इस बातचीत में महसूस किया, मानो वे खुद के एक अनदेखे रूप से दोबारा मिल रही हों।
इस पूरे अनुभव को और गहरा बनाने का काम किया एक Specially Designed Activity ने। इसके जरिए प्रतिभागियों ने अपने भीतर झांककर देखा, अपनी अब तक की यात्रा को बिल्कुल नए नजरिए से समझा और खुद को नए सिरे से Discover किया।
Session खत्म होने के बाद माहौल और भी अपनापन भरा हो गया, जब सभी ने साथ बैठकर स्वादिष्ट Hi-Tea का आनंद लिया। इस दौरान दिल से निकली Meaningful Conversations और अनुभवों को साझा करने का सिलसिला देर तक चलता रहा। सबसे खास बात यह रही कि 100 से ज्यादा Mothers की Heartfelt Feedbacks और Testimonials ने इस पूरे आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
Fbs की संस्थापक मेघा गुप्ता ने बताया कि यह सिर्फ एक Session नहीं था, बल्कि स्त्रीत्व, मातृत्व, भावनाओं और आत्म-पहचान का एक सच्चा उत्सव था। कुछ अनुभव उस दिन के साथ खत्म नहीं होते, वे हमेशा के लिए दिल में बस जाते हैं। इस सत्र से मिली सीख, साझा किए गए एहसास और उस दिन आंखों में आए आंसू और मुस्कान, शायद ऐसी यादें बन गए हैं, जो हर महिला के साथ हमेशा रहेंगी।