जयपुर की शाम में गूंजा 'है अपना दिल तो आवारा', सुरों की महफिल में झूम उठे श्रोता

राजस्थान इंटरनेशनल केंद्र में रविवार शाम कुछ ऐसी सजी कि हर धुन पर तालियों की गूंज उठी। "कहीं दीप जले कहीं दिल" से शुरू हुआ सफर "है अपना दिल तो आवारा" तक पहुंचा, तो पूरा सभागार भावुक हो उठा।

Aug 10, 2026 - 07:23
Aug 10, 2026 - 07:24
 0
जयपुर की शाम में गूंजा 'है अपना दिल तो आवारा', सुरों की महफिल में झूम उठे श्रोता

अनन्य सोच । सुकून सुर रागिनी संस्था (Sukoon Sur Raagini) द्वारा आयोजित संगीतमय शाम रविवार को राजस्थान इंटरनेशनल केंद्र (Rajasthan International Centre) में यादगार पलों के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर गीत "कहीं दीप जले कहीं दिल" से हुई, जिसने माहौल में सुरों की अलग ही छटा बिखेर दी और श्रोताओं को कुर्सियों से बांध कर रखा।

मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री अहमद हुसैन (Padma Shri Ahmed Hussain) और पद्मश्री मोहम्मद हुसैन (Padma Shri Mohammad Hussain) मौजूद रहे। इनके साथ शहर की कई जानी-मानी हस्तियां और कला जगत से जुड़े गणमान्य लोग भी शामिल हुए। बड़ी संख्या में मौजूद संगीत प्रेमियों ने सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया।

संस्था की निदेशक नीरा राजवंशी (Neera Rajvanshi) ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि संगीत के जरिए लोगों को मानसिक सुकून पहुंचाना ही संस्था का मुख्य लक्ष्य है। व्यवस्था की कमान समन्वयक आयुषी कुलश्रेष्ठ और मुकुल कुलश्रेष्ठ ने संभाली, जबकि मंच संचालन जितेंद्र नाग ने बखूबी निभाया।

इसके बाद एक से बढ़कर एक सदाबहार गीतों की झड़ी लग गई — "हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे", "तुम्हारी नज़र क्यों ख़फ़ा हो गई", "अभी न जाओ छोड़कर", "जादूगर तेरे नैना", "जाने क्या बात है" और "देखो मैंने देखा है एक सपना"। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज कलाकारों का हौसला बढ़ाती रही।

शाम का समापन जब "है अपना दिल तो आवारा" गीत के साथ हुआ, तो पूरा सभागार झूम उठा। कर्नल बी एल माथुर, अनुपमा माथुर और मुकेश मुटरेजा का इस आयोजन में विशेष सहयोग रहा। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और सहयोगियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। दर्शकों ने कार्यक्रम को खूब सराहा और इसे लंबे समय तक याद रखे जाने वाला बताया।